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Pradosh Vrat 2024: कब है माघ माह का आखिरी प्रदोष व्रत, यहां जाने शुभ मुहूर्त और पूजन-विधि

Pradosh Vrat 2024: हिंदू धर्म में पंचाग के मुताबिक हर महीने में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को बहुत महत्व दिया गया है। इस दिन भोलेनाथ के भक्त व्रत रखते हैं। साथ ही महादेव की आराधना करते है। कहा गया है ...

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By: DNP न्यूज़ डेस्क

Published: फ़रवरी 17, 2024 6:02 अपराह्न

Pradosh Vrat 2024
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Pradosh Vrat 2024: हिंदू धर्म में पंचाग के मुताबिक हर महीने में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को बहुत महत्व दिया गया है। इस दिन भोलेनाथ के भक्त व्रत रखते हैं। साथ ही महादेव की आराधना करते है। कहा गया है कि, इस व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं साथ ही अपने भक्तों को सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

शिवपुराण के मुताबिक, जो भी मनुष्य पूरे नियम और निष्ठा से हर प्रदोष का व्रत रखता है। उसके सभी कष्टों का निवारण होता है। वहीं, त्रयोदशी के दिन प्रदोष काल यानि शाम के समय माता पार्वती और भगवान शंकर की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि, प्रदोष काल में की गई भगवान शिव की पूजा बहुत अधिक फलदायी साबित होती है। तो चलिए जानते हैं कि, माघ माह में दूसरा प्रदोष व्रत कब है।

Pradosh Vrat 2024: माघ माह में दूसरा प्रदोष व्रत कब?

Pradosh Vrat 2024 व्रत तिथि

माघ का शुक्ल प्रदोष व्रत 21 फरवरी 2024 बुधवार को मनाया जाएगा। अब यह व्रत बुधवार के दिन पड़ रहा है तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ गणेश जी की भी पूजा करनी चाहिए।

Pradosh Vrat 2024 मुहूर्त

हिंदू पंचांग के मुताबिक, माघ माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरूआत 21 फरवरी 2024 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 22 फरवरी 2024 को दोपहर 01 बजकर 21 मिनट पर होगा। वहीं, प्रदोष व्रत की पूजा शाम को की जाती है। तो पूजा का समय शाम 06 बजकर 15 मिनट से रात 08 बजकर 47 मिनट तक है।

Pradosh Vrat 2024 ऐसे करे पूजन

1- सबसे पहले इस दिन सूर्योदय होने से पहले उठकर स्नान, ध्यान करें। उसके बाद प्रदोष व्रत का संकल्प लें और शिव जी की पूजा करें।

2-वहीं, शाम के समय स्नान करें और सूर्यास्त के समय प्रदोषकाल में भगवान शिव की विधि विधान से पूजा करें।

3-इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा सुनें और कुश के आसन पर उत्तर पूर्व की दिशा में बैठकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।

4-शिव जी को जल चढ़ाते समय जलाभिषेक करें। साथ ही श्री शिवाय नमस्तुभ्यम मंत्र का जाप करें।

5-इसके बाद भगवान शिव को बेल पत्र, गंगाजल, अक्षत और धूप दीप आदि से पूजा करें।

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