The Voice Of Hind Rajab: इजरायल ईरान वॉर के बीच भारत की सेंसर बोर्ड की तरफ से ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म ‘द वॉयस ऑफ हिंद रजब’ को बैन कर दिया गया है। इसे लेकर एक अलग ही बहस की शुरुआत हो गई है इस सब के बीच आइए जानते हैं आखिर इस फिल्म की क्या कहानी है जिसे बैन करने के समय इजराइल और भारत के संबंध को नुकसान पहुंचाने का हवाला दिया गया है। आइए जानते हैं द वॉयस ऑफ हिंद रजब की कंट्रोवर्सी क्या है जिसकी वजह से सेंसर बोर्ड को कायर कहा जा रहा है। इस दौरान यह भी कहा गया कि क्या सेंसर बोर्ड की विदेश नीति एक भी सच्ची कहानी का बोझ नहीं उठा सकती है।
क्यों हो रहा The Voice Of Hind Rajab बैन के बाद बवाल
द वॉयस ऑफ हिंद रजब को सेंसर बोर्ड की तरफ से बैन करने की खबर जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो लोग इसे लेकर प्रतिक्रिया देने में पीछे नहीं रहे हैं। जहां लोग सरकार पर भी सवाल उठा रहे हैं लोगों को यह बात हजम नहीं हो पा रही है कि “इजरायल के साथ अपने गठबंधन को बचाने के लिए द वॉयस ऑफ हिंद रजब जो एक बच्चे की मौत पर बनी हुई ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म है उसे बैन कर दिया गया है। एक फिल्म किसी देश के रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकती है यह सोच कर भी मुझे शर्म आती है। खास कर जब वह फिल्म सच्चाई पर आधारित हो।”
क्या है द वॉयस ऑफ हिंद रजब की कहानी
हालांकि यह लोगों की अपनी-अपनी प्रतिक्रिया है लेकिन द वॉयस ऑफ हैंड रिजर्व बैंक से हटके अगर इसकी कहानी की बात करें तो ट्यूनीशियाई फिल्ममेकर कौथर बेन हानिया के डायरेक्शन में बनी यह डॉक्यूड्रामा हिंद रजब नाम की 5 साल की फ़िलिस्तीनी लड़की की दिल को छू लेने वाली कहानी बताती है जो 2024 में गाजा में इज़राइल के हमले के दौरान एक कार में मरी हुई मिली थी। तौर पर उसे 335 गोलियां लगी थीं। यह फ़िलिस्तीनी रेड क्रिसेंट सोसाइटी की रजब और उसकी 15 साल की कज़िन को बचाने की कोशिशों के बारे में बताती है जो गोलीबारी में फंस गई थी।
भारत में इस फिल्म को देखने के लिए फैंस लंबे समय से इंतजार में थे और ऐसे में अब बैन की खबर निश्चित तौर पर लोगों को चौंका रही है।
