Diabetes : नई जनरेशन में शुगर की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही है। इसीलिए डॉक्टर तरंग कृष्ण के द्वारा इसके कारण और बचाव के बारें में बताया जा रहा है। उनका कहना है कि, जेन-जी युवा पीढ़ी में प्री-डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा पुरानी जनरेशन के मुकाबले काफी तेजी से बढ़ रहा है। पहले जिसे उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था, वह अब युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। अगर आप भी शुगर की समस्या से बचना चाहते हैं तो हेल्थ एक्सपर्ट से जरुर जानें।
Diabetes कैसे जेनजी में बढ़ रहा है?
डॉक्टर तरंग कृष्ण का कहना है कि, ‘ काफी लोगों को लगता है कि डायबिटीज़ सिर्फ़ बुज़ुर्गों की बीमारी है, लेकिन यह जानकर आपको हैरानी होगी कि आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। असल में खराब आदतों की वजह से अब ज़्यादा युवा प्री-डायबिटिक स्टेज की चपेट में आ रहे हैं।’ इसके साथ ही की मेडिकल रिपोर्ट्स और रिसर्च की मानें तो जेन-जी में टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा पिछली पीढ़ियों के मुकाबले काफी तेजी से बढ़ रहा है। इसके कारण उनकी बदली हुई लाइफस्टाइल है।वजन और शुगर कंट्रोल करने के लिए जेन-जी अक्सर डाइट सोडा या शुगर-फ्री ड्रिंक्स चुनती है। लेकिन डॉक्टर तरंग कृष्णा का कहना है कि, ये आर्टिफिशियल स्वीटनर्स आपके दिमाग को भ्रमित करते हैं, जिससे मीठे की और क्रेविंग बढ़ती है। ये इंसुलिन और मेटाबॉलिज्म को धीमा कर डायबिटीज का खतरा और बढ़ा देते हैं। काफी लोग दूध की जगह स्मूदी पीते हैं। ये मॉर्डन ड्रिंक जरुर है। लेकिन हेल्थ को बहुत ही बुरी तरह से प्रभावित करते हैं।
डायबिटिज से कैसे बचें जेनजी?
डॉक्टर का कहना है कि, आज का युवा लगातार स्क्रीन और मानसिक तनाव में रहता है। यहां तक कि परिवार के साथ डिनर टेबल भी करियर, पढ़ाई या काम के तनाव की चर्चा का केंद्र बन जाती है, जिससे शरीर का संतुलन बिगड़ता है।इसका खुलासा कई सारी रिपोर्ट्स और डॉक्टर्स ने भी किया है। इसीलिए वो अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और हिडन शुगर से बचने की सलाह दे रहे हैं। वहीं, नींद की कमी को दूर करने और स्क्रीन टाइम को भी कम करने की सलाह दे रहे हैं। फास्ट फूड को डाइट से निकालना है। इसके साथ ही रोजाना एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन करने की सलाह दे रहे हैं।
Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।







