Joint Pain Relief: हड्डियों में दर्द अब हर आयु वर्ग के लोगों में होता है. कई बार दवा खाने के बाद भी आराम नहीं मिलता है. ऐसे ही पीड़ितों के लिए डॉक्टर सलीम जैदी के द्वार देसी इलाज बताया जा रहा है.हड्डियों के दर्द का कारण बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों का कमजोर होना और कार्टिलेज का घिसना होता है. जब जोड़ों के बीच के लुब्रिकेंट का कम हो जाता है तो दर्द होना शुरु हो जाता है.
Joint Pain Relief के लिए करें तिल का सेवन
डॉक्टर सलीम जैदी का कहना है कि,भीगे हुए तिल को खाना चाहिए.ये कैल्शियम के अब्सॉर्प्शन को भी 30% तक बढ़ा देता है। इसके लिए रात को सोने से पहले एक टेबलस्पून काले तिल ले लीजिए और इन्हें एक गिलास पानी में भिगो दीजिए. आप सुबह उठकर उस पानी को आप छान लीजिए.भीगे हुए तिल को चार पांच किशमिश के साथ खाली पेट चबा चबाकर खा लीजिए और ऊपर से एक गिलास सिंपल पानी पी लीजिए.
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वीडियो क्रेडिट-Healthy Hamesha
भीगे हुए तिल खाने का बेस्ट टाइम होता है सुबह को 6:00 से 8:00 बजे के बीच में खाली पेट है. अगर गर्मी के मौसम ज्यादा है जैसे कि आजकल चल रहा है तो ऐसे में आप क्वांटिटी को आधा कर दीजिए। और अगर सर्दी में इसको ले रहे हैं तो पूरा एक टेबलस्पून भर के लीजिए। आपको इससे बहुत फायदा मिलेगा। तिल और दही की चटनी बनाकर खाना भी काफी फायदा देता है. क्योंकि दही की जो ठंडी तासीर है वह तिलकी गर्मी को बैलेंस कर देती है और साथ ही यह टेस्ट में भी बहुत अच्छा लगता है.
तिल कैसे हड्डियों के दर्द में राहत देता है?
हेल्थ एक्सपर्ट सलीम जैदी के अनुसार, तिल में दूध से भी कहीं अधिक मात्रा में कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक पाया जाता है. उम्र बढ़ते ही हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है. रोजाना तिल का सेवन करने से हड्डियां अंदर से मजबूत होती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों का खोखलापन दूर होता है. बढ़ती उम्र में जोड़ों का लुब्रिकेंट सूखने लगता है, जिसे आम भाषा में ग्रीस खत्म होना कहते हैं. तिल में मौजूद हेल्दी फैट्स और ओमेगा फैटी एसिड्स जोड़ों में प्राकृतिक चिकनाई को दोबारा बनाने में मदद करते हैं, जिससे हड्डियों का आपसी घर्षण और कट-कट की आवाज आना बंद हो जाती है. ये शरीर के अंधरुनी सूजन को भी कम करता है.
Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।
