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Cyber Crime: क्या होती है M2M सिम साइबर ठगी? जानें इस नई तकनीक का पूरा खेल

Cyber Crime:आजकल साइबर ठगी आम बात हो गई है। अगर इससे बचा जा सकता है तो केवल लोगों की सजगता ही उन्हें अपराध का शिकार बनने से रोक सकती है। लेकिन साइबर ठग भी दिनों दिन एडवांस होते जा रहे हैं। जिसमें ठग, ठगने के लिए नई तकनीक खोजते हैं। वहीं, देहरादून से एक अलग ...

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By: DNP न्यूज़ डेस्क

Published: फ़रवरी 23, 2024 5:15 अपराह्न

Cyber Crime
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Cyber Crime:आजकल साइबर ठगी आम बात हो गई है। अगर इससे बचा जा सकता है तो केवल लोगों की सजगता ही उन्हें अपराध का शिकार बनने से रोक सकती है। लेकिन साइबर ठग भी दिनों दिन एडवांस होते जा रहे हैं। जिसमें ठग, ठगने के लिए नई तकनीक खोजते हैं। वहीं, देहरादून से एक अलग ​तरीके की साइबर ठगी हुई है। इसको एम 2 एम सिम कार्ड के ​जरिए ठगी की गई है। बताया जा रहा है कि इस तरीके के अपराध करने और फर्जी सिम कार्ड्स की ये अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी बताई जा रही है। जिसमें उसके साथ 80 लाख की ठगी की गई है।

Cyber Crime: देहरादून में मिला केस

वहीं, एक ऐसी ही केस देहरादून से भी सामने आया है। जिसमें एम2एम सिम साइबर ठगी एक व्य​क्ति के साथ हुई है। इस साइबर क्राइम में पीड़ित से करीब 80 लाख रूपये की ठगी हुई है। जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस में जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई। हालांकि, उत्तराखंड एसटीएफ ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

चलिए जानते हैं एम 2 एम सिम Cyber Crime के बारे में..

दरअसल, फोन का यूज करने वाले अधिकतर लोग सिम कार्ड को एक छोटी सी चिप जो फोन के एक स्लॉट में लगती है। इस सिम कार्ड के ​जरिए सेल्युलर नेटवर्क और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि, सिम कई प्रकार के होते हैं। इनमें से एक है एम2एम सिम जो क्लासिक सिम के मुकाबले इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉली का एडवांस रूप है।

वहीं, इस बारे में एक्सपर्ट बताते हैं कि, एम2एम यानी मशीन टू मशीन और सिम मतलब सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल। यह फोन के अंदर एक छोटी सी कंप्यूटर चिप जैसा होता है जो फोन को सेल्युलर नेटवर्क और दूसरी डिवाइस से जोड़ती है। इसमें मानव इनपुट की जरूरत नहीं होती।

एम2एम सिम में सेंसर होते हैं जो अपने आसपास के वातावरण से इनपुट ले सकते हैं। इसमें नेटवर्क डिवाइस बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के जानकारी का आदान प्रदान करते हैं। ये हमारे ​डेबिट का्रर्उ स्वाइपिंग मशीन, पीओएस यानि प्वाइंट ऑफ सेल डिवाइस की तरह कार्य करता है। ये सभी एम2एम संचार का इस्तेमाल करते हैं।

नॉर्मल सिम से कैसे अलग

एम2एम सिम हमारे फोन में लगने वाले रेगुलर सिम से अलग है। हालांकि, इस सिम को भी एक फोन से दूसरे फोन में डाला जा सकता है। इसका मतलब है कि, यह सिम दूसरी इंटरनेट डिवाइस और सिस्टम के साथ डेटा एक्सचेंज कर सकते हैं। इस प्रकार के कम्यूनिकेशन का यूज वेयरहाउस मैनेजमेंट, रोबोटिक्स, ट्रैफिक कंट्रोल, सप्लाई चेन सेवा, रिमोट कंट्रोल और बहुत ही अन्य चीजों में किया जाता है।

क्लाउड के साथ डेटा को जोड़ता है

इसके अलावा इसका इस्तेमाल (IOT) इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइस के लिए किया जा सकता है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स होता ​है कि, एक ऐसे डिवाइस का नेटवर्क जो दूसरे इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइस और क्लाउड के साथ डेटा को जोड़ता है और कम्यूनिकेशन प्रदान करता है। यह डिवाइस आमतौर पर सेंसर और सॉफ्टवेयर जैसी टेकनीक से जुड़ती है।

जहां नॉर्मल सिम को फोन और टैबलेट के उपयोग के लिए डिजाइन किया जाता है। वही, एम2एम सिम को स्पेशली मशीन टू मशीन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स में यूज किया जाता है। इसको फोन में डाला जा सकता है। हालांकि, इनका आकार नॉर्मल सिम जैसा ही होता है। लेकिन इसको यूज करने के​ तरीके बहुत अलग होते हैं।

सिम को दूर से मैनेज करना मुश्किल होता है

उदाहरण के लिए हम आपको बताएं तो एक नॉर्मल सिम को दूर से एक्सेस या मैनेज करना मुश्किल होता है, क्योंकि वो हमारे फोन के उपयोग के तरीके से बनाए जाते हैं। नॉर्मल सिमि से हम फोन करना, मैसेज भेजना, और इंटरनेट ब्राउज करते हैं। लेकिन एम2एम सिम का इस्तेमाल इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइस में किया जाता है। जो नियमित टाइम इंटरवर पर छोटी मात्रा में डेटा भेजते हैं। इसमें फोन नंबर या एचडी वीडियो स्ट्रीमिंग बैंडविड्थ की जरूरत नहीं होती है।

नॉर्मल सिम की तुलना में ज्यादा मजबूत

साथ ही ये सिम नॉर्मल सिम की तुलना में ज्यादा मजबूत होते हैं। एम2एम सिम -40°C से 105°C के बीच के तापमान का सामना भी कर सकता है। एम2एम सिम कई साइज में आते हैं, जैसे- 2FF मिनी, 3FF माइक्रो, 4FF नैनो (ये तीनों सिम फोन में लगाए और निकाले जा सकते हैं) और MFF2, WLCSP, MFF-XS (ये तीनों फोन में एम्बेड किए जाते हैं जो निकाले नहीं जा सकते, इन्हीं को e-sim कहा जाता है)।

एम2एम सिम कार्ड कहां यूज होता है

इसका यूज अधिकतर व्यापार और अद्योग में किया जाता है। लॉजिस्टिक्स में एम2एम सिमि का यूज वाहन ट्रैकिंग और संपत्तियों की जीपीएस निगरानी के लिए किया जाता है।
इसके जरिए दूर बैठे ही ड्राइवर के व्यवहार की निगरानी और वाहनों के मैकेनिकल इश्यू के बारे में जानकारी मिल जाती है। एम2एम सिम के जरिए दुनिया में कहीं भी सामान और पैकेज को ट्रैक किया जा सकता है।

मैनुफैक्चरिंग कंपनियां करती है इस्तेमाल

एम2एम सिम का यूज मैनुफैक्चरिंग कंपनियां करती हैं। कंपनियां अपनी मशीनरी को सेंट्रल प्लेटफार्मों से जोड़ती हैं। यह इंजीनियरों को मशीनों की स्थिति और संभावित देखभाल की आवश्यकताओं पर रियल टाइम रिपोर्ट देता है। इसका यह फायदा होता है कि मशीन की खराबी से पहले ही उसकी मरम्मत की जा सकती है।

वहीं, सुरक्षा को देखते हुए भी एम2एम सिम काफी यूज किए जाते हैं। अधिकतर सीसीटीवी और सिक्योरिटी सिस्टम वाई फाई के ​जरिए इंटरनेट से जुड़ी रहती हैं। लेकिन वाई फाई बंद होने की स्थिति में एम2एम सिम लोकल मोबाइल नेटवर्क से जुड़कर बैकअप कनेक्टिविटी देते हैं और इससे सिक्योरिटी सिस्टम फेल नहीं होता। इसके अलावा हैवी इंडस्ट्री और रिटेल में भी एम2एम ​सिम का यूज किया जाता है। जिसमें एक्सट्रीम कंडिशंस जैसे गर्मी ठंड और भारी मशीनरी के कंपन जैसी परिस्थितियों और कठिन सेटिंग्स में ये टेक्नोलॉजी काम आती है।

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DNP न्यूज़ डेस्क उत्कृष्ट लेखकों एवं संपादकों का एक प्रशिक्षित समूह है. जो पिछले कई वर्षों से भारत और विदेश में होने वाली महत्वपूर्ण खबरों का विवरण और विश्लेषण करता है.उच्च और विश्वसनीय न्यूज नेटवर्क में डीएनपी हिन्दी की गिनती होती है. मीडिया समूह प्रतिदिन 24 घंटे की ताजातरीन खबरों को सत्यता के साथ लिखकर जनता तक पहुंचाने का कार्य निरंतर करता है
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