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Cancer की जंग में क्या मेडिटेशन और आस्था कर सकती है मरीज की मदद, टॉप एक्सपर्ट ने कहा कुछ ऐसा जो है शॉकिंग

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Photo Credit- Google Cancer

Cancer: क्या प्रार्थना, मेडिटेशन और आस्था कैंसर जैसे रिस्क को कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस बारे में डॉक्टर तरंग कृष्ण ने क्या कहा है। सबसे बड़े कैंसर एक्सपर्ट ने कुछ ऐसा कहा है जो आपको आस्था और मेडिटेशन को लेकर नजरिया बदल सकता है। दवाइयों के साथ-साथ क्या मेडिटेशन और आस्था करने से फायदा हो सकता है। कैंसर जैसी बीमारी जिसका नाम सुनते ही लोगों की रूह कांप जाती है इसमें मेडिटेशन फायदेमंद हो सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में डॉक्टर तरंग की राय जो आपके हेल्थ के लिए फायदेमंद है।

आखिर क्या कैंसर जहां आध्यात्मिकता है कारगर

ऐसे में इस परेशानी के बारे में बात करते हुए डॉक्टर तरंग कृष्ण कहते हैं कि मेरा सुझाव है कि अगर आप नास्तिक नहीं है फिर भी किसी सुपर पावर में भरोसा जरूर करें। यह आपकी मदद कर सकता है। क्रोनिक डिजीज जैसे कैंसर सिर्फ फिजिकल बीमारी नहीं है यह काफी हद तक इमोशनल और मेंटल ट्रॉमा होता है। यह आपके दिल और दिमाग के बीच जंग होता है और इसी जगह आध्यात्मिकता काम आती है। यह आपकी स्ट्रैंथ बन सकती है।

कैसे कैंसर में फायदेमंद है मेडिटेशन और आस्था

मेडिटेशन, आस्था आपके स्ट्रेस हार्मोन के कॉर्टिसोल को 25% तक कम कर सकता है और कम स्ट्रेस का मतलब आपकी इम्यूनिटी स्ट्रांग हो सकती है। ऐसे में आपका जो इलाज चल रहा इसका असर देखने को मिल सकता है। दवाई आपके शरीर को ठीक कर रहा है लेकिन स्पिरिचुअलिटी आपके दिमाग और आत्मा दोनों को बेहतर बना रही है। ऐसे में कैंसर जैसी बीमारी को आप आसानी से मात दे सकते हैं।

Cancer में कैसे आस्था बन सकती है मसीहा

कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी है कि आप naa सिर्फ फिजिकल बल्कि मेंटली भी स्ट्रांग बन सके। ऐसे में योग और मेडिटेशन के साथ-साथ आस्था आपके लिए अहम भूमिका निभा सकती है। यह आपके दिमाग और आत्मा के लिए किसी दवाई से कम साबित नहीं होगा। आस्था और स्पिरिचुअलिटी का मतलब किसी धर्म से नहीं है बल्कि यह मानसिक शांति को लेकर है जो हर किसी के लिए जरूरी है।

Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।

 

 

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