Cancer: अगर आप अपने लाइफस्टाइल पर ध्यान दे तो कैंसर काफी हद तक डिटेक्ट कर सकते हैं। यह सच है कि अक्सर सालों तक यह चुपचाप बढ़ता है लेकिन 5 तरह के ऐसे लोग होते हैं जिन्हें कैंसर का सामना बहुत कम करना पड़ता है। आपकी रोज की आदत कैंसर को बढ़ा सकती है लेकिन इस सब के बीच क्या आपको पता है कि 5 तरह के लोग ऐसे होते हैं जिन्हें यह बीमारी कभी नहीं हो सकती है। 30 साल से ज्यादा के एक्सपीरियंस रखने वाले डॉक्टर ने इस बारे में बड़ा दावा किया है।
Cancer ऑर्गेनिक इन्फ्लेमेशन का है काफी गहरा कनेक्शन
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कैंसर तभी पैदा होता है जब इन्फ्लेमेशन होता है। क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन बढ़ने की वजह से है। ऐसे में शुगर और रिफाइंड के साथ ट्रांस फैट और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड के साथ-साथ नींद की कमी और अल्कोहल स्मोकिंग जैसे टॉक्सिंस से दूर रहे।
ब्लड शुगर स्टेबल करते रहे
कैंसर सेल्स नॉर्मल सेल्स से ज्यादा शुगर को अपनी तरफ खींचता है। अगर आपका ब्लड शुगर हाई है तो आप इसके घेरे में है। अगर आपका ब्लड शुगर लेवल ठीक है तो आप खतरे के रिस्क में नहीं है।
कैंसर से बचने के लिए स्ट्रांग इम्यूनिटी है जरूरी
कैंसर तभी बढ़ता है जब आपकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। एक्सपर्ट के मुताबिक ऐसे लोगों को भी कैंसर हो सकता है जिनका परफेक्ट डाइट हो। ऐसे में स्ट्रांग इम्यूनिटी वाले लोग खुद को सरवाइव कर पाते हैं।
क्रॉनिक स्ट्रेस को दूर कर कैंसर रिस्क को करें कम
अगर क्रॉनिक स्ट्रेस यानी हाई कोर्टिसोल से आप नहीं जूझ रहे हैं तो इसकी वजह से इम्यूनिटी से लेकर इन्फ्लेमेशन और ब्लड शुगर को आप कंट्रोल कर सकते हैं। ऐसे में कैंसर आपके पास भी नहीं भटक सकता है। अगर आप स्ट्रेस में होते हैं या 7 घंटे से कम सोते हैं। विटामिन डी की कम मात्रा होती है।
हर दिन मूवमेंट करने वाले लोग हैं खतरे से
हर दिन मूवमेंट आपके कैंसर रिस्क को 30 से 50% कम कर सकता है यह इसलिए नहीं क्योंकि यह हेल्दी होता है बल्कि इसकी वजह से इन्फ्लेमेशन कम होता है। आपकी इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है। ब्लड शुगर के साथ-साथ स्ट्रेस कम होता है। ऐसे में 10000 स्टेप्स एक दिन चलने वाले लोगों में रिस्क कम होता है जो 8 घंटे लगातार बैठे रहते हैं।
Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।






