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तलाकशुदा लोगों की जिंदगी में बरसेगा सुख-चैन! Premanand Maharaj ने बताया Divorce के बाद जीवन जीने का तरीका; नोट करें खास प्वाइंट्स

गुरु Premanand Maharaj ने उन खास बिंदुओं का जिक्र किया है जिसे एक तलाकशुदा पुरुष या महिला को अपनाना चाहिए ताकि वो सुख-चैन के साथ अपनी जिंदगी जी सकें। प्रेमानंद महाराज ने बताया है कि कैसे इस आधुनिक समय में तलाकशुदा लोग अपनी जिंदगी खुशीपूर्वक व्यतीत कर सकते हैं।

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By: Gaurav Dixit

Published: मई 6, 2025 7:14 अपराह्न

Premanand Maharaj
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Premanand Maharaj: विषम परिस्थितियों से तमाम इंसान गुजरते हैं, लेकिन उनकी पीड़ा अलग होती है जिन्हें शादी के बाद अपना पार्टनर खोना पड़ता है। यहां बात तलाकशुदा लोगों के संदर्भ में की जा रही है। ऐसे लोगों के लिए गुरु प्रेमानंद महाराज ने खास संदेश दिए हैं। प्रेमानंद महाराज ने बताया है कि आधुनिकता के इस दौर में Divorce के बाद लोग कैसे सुख व चैन के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सकते हैं। Premanand Maharaj ने इसके लिए कुछ खास प्वाइंट्स भी सुझाए हैं। गुरु प्रेमानंद ने बताया है कि कैसे भगवत नाम का जप करना तलाकशुदा लोगों के लिए शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करने का एक माध्यम बन सकता है।

तलाकशुदा लोगों के लिए Premanand Maharaj की खास अपील!

एक ऐसा सवाल राधा केली कुंज में आया जिसे सुन सभी हैरत में पड़ गए। सवाल किया गया कि डिवोर्स के बाद अकेले कैसे जीवन व्यतीत करें। इस सवाल का जवाब देते हुए गुरु प्रेमानंद महाराज ने कहा कि “जब तक हम अंतवृत्ति को भगवान से नहीं जोड़ते हैं तब तक असंगता हो ही नहीं सकती क्योंकि मन किसी न किसी वस्तु व्यक्ति स्थान का आश्रय लिए बिना रह नहीं सकता। इसका स्वभाव है। यह आश्रय ले ही रहेगा। देखो आप शांत होकर देखो तो कोई व्यक्ति चल रहा है।” Premanand Maharaj आगे कहते हैं कि “शांतिपूर्ण जीवन के लिए हमें हर समय राधा नाम जप करना है। अंदर से वृत्ति जोड़नी होगी। तब कहीं जाकर मन शांत रहेगा और तलाक के बाद या किसी भी विषय परिस्थिति में व्यक्ति सुख-शांति के साथ जीवन व्यतीत कर सकता है।”

शांतिपूर्ण जीवन के लिए नोट कर लें गुरु प्रेमानंद महाराज के संदेश!

भजनमार्ग के यूट्यूब चैनल से जारी वीडियो में Premanand Maharaj ने शांतिपूर्ण जीवन जीने के तरीके बताए हैं। उनका कहना है कि लोगों को दिखावे की दुनिया से हटकर भीतर और बाहर दोनों से एक होना चाहिए। हमें भगवान आश्रय लेना चाहिए। हम जिससे भी मिले, हमारा पवित्र व्यवहार हो, गंदा आचरण नहीं हो, कोई गाली भी दे तो हम सुन के सह जाए, किसी को पलट के गाली ना दें और भगवान के नाम का जप करते रहें। ऐसा करने पर धीरे-धीरे हमारे अंदर अध्यात्म की वह योग्यता आएगी जिसे असंगता कहते हैं। ऐसा होने के बाद व्यक्ति सुख-चैन की अनुभुती करते हुए अपना जीवन व्यतीत कर सकता है और सत्मार्ग पर चल सकता है।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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