OnePlus: अगर आप ओप्पो का स्मार्टफोन या फिर कोई भी अन्य डिवाइस खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो थम जाएं, क्योंकि ये कंपनी बंद हो सकती है। इंटरनेशल मीडिया में खबरे हैं कि, अमेरिका, यूरोप सहित भारतीय मार्केट से चीन की कंपनी वनप्लस अपना बोरिया बिस्तर समेट रही है। ये फैसला रियलमी और वनप्लस की पैरेंट कंपनी ओप्पो ले रही हैं। वनपल्स के डिवाइस बजट फ्रेंडली कीमत के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि, भारत में इनकी ठीक -ठाक संख्या है। लेकिन अब ये फोन शायद ही यूजर्स को मिले। चलिए आपको वनप्लस को इस हालत में पहुंचाने वाले 5 बड़े कारणों की जानकारी देते हैं।
OnePlus के बंद होने का कारण सीईओ रॉबिन ली का इस्तीफा
खबरों की मानें तो वनप्लस की इस हालत का एक कारण वनप्लस इंडिया के सीईओ रॉबिन ली का इस्तीफा देना है। इसके साथ ही भारत में कंपनी को टैक्स और रिप्लेसमेंट प्रोग्राम से जुड़े कानूनी नोटिसों का भी सामना करना पड़ा है, जिसने कंपनी पर प्रशासनिक दबाव बढ़ा है।
ऐपल और वनप्लस का पंगा
अमेरिका में चीनी ब्रांड्स को लेकर कड़े नियम और ऐपल के साथ चल रहे ट्रेड सीक्रेट से जुड़े कानूनी विवाद ने वनप्लस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिसके कारण अमेरिका से वनप्लस का बोरिया बिस्तर सिमट रहा है।
OxygenOS सॉफ्टवेयर का बदलना
ऐसी खबरे हैं कि, वनप्लस की सबसे बड़ी ताकत उसका क्लीन, फास्ट OxygenOS सॉफ्टवेयर था, जिसे टेक-प्रेमी बेहद पसंद करते थे। जब से ओप्पो ने इसका विलय अपने ColorOS में किया है, तब से वनप्लस ने अपनी मूल पहचान खो दी।
डिमांड में भयंकर गिरावट
खबरो की मानें तो, वनप्लस गिरती बिक्री और भारी वित्तीय नुकसान को झेल रहा है। जिसके कारण वनप्लस के शिपमेंट में 20% से अधिक की भारी गिरावट देखी गई है। भारत में भी इसका मार्केट शेयर घटकर काफी कम रह गया है। इसीलिए कंपनी इसे बंद करने की सोच रही है।
बढ़ती कीमत
चीन की कंपनी वनप्लस बंद हो रही है। इसकी जानकारी को दुनिया के सामने ब्लूमबर्ग और विनफ्यूचर ने ब्रेक किया है। वनप्लस के बंद होने का प्रमुख कारण पुर्जों की बढ़ती लागत और चिप संकट है। डिवाइस का पार्ट महंगे होने के कारण इनकी कीमत बढ़ी है, जिसके कारण ग्राहकों के बीच डिमांड कम हुई है। वनप्लस चाहकर भी किफायती कीमत पर अपने इलेक्ट्रोनिक डिवाइस नहीं दे पा रहा है।
ओप्पो क्यों बद कर रही अपना सबब्रांड वनप्लस?
खबरों की मानें तो वनप्लस को बंद करने के पीछे ओप्पो की एक तगड़ी प्लानिंग है। ब्लूमबर्ग और विनफ्यूचर की हालिया रिपोर्ट्स की मानें तो वनप्लस की पैरेंट कंपनी ओप्पो का एक बड़ा ग्लोबल रिस्ट्रक्चरिंग और कंसोलिडेशन महाप्लान है। ओप्पो अपने रिसोर्सेज अपने अलग-अलग ब्रांड्स में बिखेरने के बजाय उन्हें एकजुट करके सीधे तौर पर ऐपल और सैमसंग से मुकाबला करना चाहती है। यही कारण है कि, वो अपने सबब्रांड को समेट रही है।







