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बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड के बीच क्या Artificial Intelligence बुजुर्गों को स्कैम से बचाने में कर सकता है मदद? इन 5 प्वॉइंट्स से समझें पूरी कहानी

Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिर्फ फोन या स्मार्ट डिवाइस तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि अब एआई की हेल्प से बुजुर्गों को ऑनलाइन स्कैम से बचाने में मदद मिल सकती है।

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By: Amit Mahajan

Published: अप्रैल 4, 2026 4:39 अपराह्न

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Artificial Intelligence: आपने एआई मतलब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का नाम सुना या पढ़ा जरूर होगा। मगर क्या आपने अभी तक इस एडवांस तकनीक का सही ढंग से इस्तेमाल किया है? जी हां, आजकल एआई का यूज स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच और कई अन्य डिवाइसों में किया जा रहा है। हालांकि, इस हाईटेक टेक्नोलॉजी का जालसाज बड़ी ही चालाकी के साथ गलत इस्तेमाल भी करते हैं। साइबर ठगों के निशाने पर बुजुर्ग लोग भी होते हैं, इसका मुख्य कारण है, अधिकतर वरिष्ठ नागरिकों को टेक्नोलॉजी और स्मार्ट डिवाइस की सही जानकारी नहीं होती है। ऐसे में एआई बुजुर्गों को ऑनलाइन स्कैम से बचाने में मदद कर सकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की सहायता से बुजुर्गों को मिल सकती है ऑनलाइन स्कैम से सेफ्टी

अगर वरिष्ठ लोगों को एआई की सही जानकारी दी जाए, तो उनके साथ होने वाले ऑनलाइन स्कैम में कमी आ सकती है।

संदिग्ध कॉल और मैसेज की पहचान- बुजुर्गों को ऑनलाइन स्कैम से बचाने के लिए एआई सिस्टम कॉल, एसएमएस, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मैसेज को एनालाइस करके फर्जी लिंक, अज्ञात नंबर, “तुरंत पैसा भेजो” जैसे संदेशों को सही समय पर पहचाना जा सकता है।

व्यवहार से धोखाधड़ी पकड़ना- एआई की मदद से अचानक बड़ा ट्रांजैक्शन, नई जगह पर पेमेंट और असामान्य बैंक गतिविधि पर नजर रखी जा सकती है।

वॉयस स्कैम से बचाव- आजकल साइबर ठग नकली आवाज यानी डीपफेक के जरिए वरिष्ठ लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में एआई किसी डीपफेक वॉयस को पकड़ सकता है।

स्मार्ट असिस्टेंट और गाइडेंस- टेक मार्केट में कई एआई चैटबॉट मौजूद हैं, जोकि बुजुर्गों को बताते हैं कि कौन सा मैसेज सेफ है और किस लिंक से खतरा हो सकता है। साथ ही किसी के साथ ओटीपी साझा न करने की सलाह भी देता है।

बैंकिंग और ऐप्स में सुरक्षा- एआई की सहायता से वरिष्ठ लोग अपने बैंक खातों को सुरक्षित रख सकते हैं। एआई की मदद से फ्रॉड ट्रांजैक्शन को रोकना, रियल-टाइम अलर्ट और संदिग्ध अकाउंट ब्लॉक करने में मदद मिल सकती है।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस भी पूरी तरह से सक्षम नहीं

ऊपर बताए गए सभी उपायों के जरिए बुजुर्गों को ऑनलाइन स्कैम से बचने में मदद मिल सकती है और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस खासी भूमिका निभा सकता है। हालांकि, एआई की भी अपनी कुछ सीमाएं हैं। एआई हर स्कैम को 100 फीसदी नहीं पकड़ सकता है। कई बुजुर्ग टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने में सहज नहीं होते हैं। साइबर अपराधी भी एआई का इस्तेमाल करके और चालाक बन रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन स्कैम से बुजुर्गों को बचाने के लिए उन्हें एआई और बेसिक डिजिटल जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही कई एआई टूल्स का इस्तेमाल करना भी आना जरूरी है।

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Amit Mahajan

अमित महाजन DNP India Hindi में कंटेंट राइटर की पोस्ट पर काम कर रहे हैं.अमित ने सिंघानिया विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में डिप्लोमा किया है. DNP India Hindi में वह राजनीति, बिजनेस, ऑटो और टेक बीट पर काफी समय से लिख रहे हैं. वह 3 सालों से कंटेंट की फील्ड में काम कर रहे हैं.
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