US-Israel-Iran War के बीच भारतीय कूटनीति का लोहा! नेतन्याहू के साथ ईरानी हुकूमत से भी मजबूत संबंध; समीकरण देख डगमगाई दुनिया

US-Israel-Iran War के बीच भारत सधी चाल चलते हुए सामांतर दिशा में आगे बढ़ रहा है। एक ओर दुनिया के तमाम देश जहां अमेरिका-इजरायल या ईरान में किसी एक पक्ष को चुन रहे हैं। वहां भारत अपनी कुटनीति के बदौलत संतुलन बरकरार रखे हुए हैं।

US-Israel-Iran War

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

US-Israel-Iran War: दुनिया भर के देश मिडिल ईस्ट में छिड़े संघर्ष का दंश झेल रहे हैं। चीन से जापान तक सत्ता हिल उठी है। भारत भी इजरायल-ईरान वॉर से प्रभावित है। हालांकि, भारत सधी रणनीति के तहत संतुलन बनाते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। इसका असर ये है कि जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए बंद है।

उसी समुद्री रास्ते से भारतीय जहाज़ कच्चा तेल और एलपीजी लिए निकल रहे हैं। ये भारत की कुटनीति को दर्शाता है। भारत इजरायली पीएम नेतन्याहू के साथ ईरानी हुकूमत से भी संबंधों को मजबूत कर रहा है। दुनिया के हालिया समीकरण को देख जहां कई देश डगमगा उठे हैं। वहां भारतीय विदेश नीति की चर्चा जोरों पर है।

भारतीय विदेश नीति का लोहा मान रहे दुनिया के कई देश!  

वैश्विक मंच की बात करें तो ऐसे तमाम देश हैं जो यूएस-इजरायल-ईरान वॉर के इस दौर में अपना पक्ष स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने या तो ईरान को चुना है, या उनका झुकाव अमेरिका-इजरायल की ओर है। हालांकि, भारत की स्थिति बिल्कुल अलग है। गुटनिरपेक्षता के मंत्र पर आगे बढ़ते हुए भारत राष्ट्रहित से जुड़े कदम उठा रहा है।

इसका परिणाम ये है कि ईरानी हुकूमत के साथ अमेरिका-इजरायल से भी भारत के संबंध मजबूत हैं। पीएम मोदी को इजरायली संसद में सर्वोच्च संसदीय सम्मान से नवाजे जाना इसका प्रमाण है। ईरान के राजदूत का नई दिल्ली में बैठकर होर्मुज से भारतीय जहाजों के सुरक्षित मार्ग के बदले में जब्त टैंकरों और दवाइयों की आपूर्ति को छोड़ने का अनुरोध करना कुटनीति को दर्शाता है।

जहां दुनिया बमबारी, मिसाइल आदि की आग में झुलस रही है। वहां भारत तमाम प्रतिबंधों के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एलपीजी और कच्चा तेल लिए जहाज़ का आना भारतीय कुटनीति का पुख्ता प्रमाण है। जहां अमेरिका तक इस नाकेबंदी से परेशान है, वहां ईरान ने ऐतिहासिक संबंधों का हावाल देते हुए भारत को विशेष छूट दी है।

इजरायल के साथ भी भारत के संबंध मजबूत हुए हैं। रक्षा प्रौद्योगिकी से लेकर खुफिया साझेदारी तक में इजरायल भारत का प्रमुख साझेदार है। एक ओर जहां पीएम मोदी इजरायल से सम्मान प्राप्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ टैंकरों की रिहाई के लिए भारत की वार्ता जारी है। भारतीय जहाज़ बिना रोक-टोक के होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे हैं।

ये सारे समीकरण यूएस-इजरायल-ईरान वॉर के कारण उपजे वैश्विक संकट के बीच भारत की सधी चाल दर्शाते हैं। जब तमाम देश अमेरिका-इजरायल या ईरान में किसी पक्ष को चुन रहे हैं। वहां भारत की विदेश नीति संभालकर देश को आगे बढ़ा रही है। भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसके टैंकरों का आवागमन अभी जारी है।

इजरायल के साथ ईरानी हुकूमत से भी मजबूत संबंध!

युद्ध के इस दौर में भारतीय विदेश नीति सामांतर दिशा में आगे बढ़ रही है। भारत के संबंध इजरायल से पहले ही मजबूत हैं। फरवरी के आखिरी सप्ताह में पीएम मोदी की तेल अवीव में हुई मेजबानी इसका पुख्ता प्रमाण है। इसी के साथ भारत ईरानी हुकूमत से भी मजबूत संबंधों का दावा करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित निकल रहे भारतीय जहाज़ इन दावों पर मुहर लगाते हैं।

नई दिल्ली और तेहरान के बीच वार्ता का दौर लगातार जारी है। तमाम उठा-पटक के बीच भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से वार्ता कर कई पहलुओं पर चर्चा किया। ये दर्शाता है कि कैसे भारत अपनी कुटनीति की बदौलत इजरायल के साथ ईरान से भी परस्पर संबंधों को मजबूत करते हुए अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसकी चर्चा दुनिया भर में है।

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