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Asim Munir, पाकिस्तान के लिए वरदान या अभिशाप? जानें पड़ोसी मुल्क को मौत की मुंह में ढ़केलने वाले कट्टर इस्लामिस्ट का अतीत

कट्टरपंथी होने के साथ तानाशाह जिया-उल-हक के बनाए पदचिन्हों पर चलने वाले Asim Munir क्या पाकिस्तान का बंटाधार कर मानेंगे? ये सवाल ऐसी परिस्थिति में उठ रहा है जब ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान एक बार फिर जंग और तख्तापलट के मुहाने पर एक साथ खड़ा है।

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By: Gaurav Dixit

Published: मई 9, 2025 10:51 पूर्वाह्न

Asim Munir
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Asim Munir: गोला-बारूद और बमबारी के बीच पाकिस्तान की सियासी पृष्ठभूमि भी धीरे-धीरे खिसक रही है। खबर है कि पाकिस्तानी सेना एक बार फिर चुनी हुई सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंक सकती है। इन सबके पीछे मास्टरमाइंड आसिम मुनीर के रूप में एक ऐसा शख्स खड़ा है जो कट्टरपंथ के साथ इस्लामीकरण को बढ़ावा देने वाला है। सवाल है कि क्या आसिम मुनीर, Pakistan के लिए वरदान है या अभिशाप? पड़ोसी मुल्क को मौत की मुंह तक ढ़केलने वाले Asim Munir का अतीत भी बेहद खास है। चाहें मदरसे में पढ़ना हो या जनरल जिया-उल-हक के पदचिन्हों पर चलना, आसिम मुनीर इन सभी पैमानों पर खरा उतरते हुए पाकिस्तान को नई दिशा देने के लिए आतुर है। हालांकि, अबकी बार स्थिति पूरी तरह से भिन्न है और सामने प्रतिद्वंदी के रूप में खड़ा है भारत, जो पाकिस्तान को नाको चने चबवाने की कुबत रखता है।

कट्टरपंथी Asim Munir, पाकिस्तान के लिए वरदान या अभिशाप?

इसको आप ऐसे समझिए कि आसिम का अतीत बेहद दागदार रहा है। अपने निजी लाभ के लिए आसिम मुनीर पर मुल्क को दांव पर लगाने के आरोप भी लग चुके हैं। रावलपिंडी में जन्मे आसिम मुनीर पाकिस्तानी सेना के 11वें अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। मदरसा में प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने वाला जनरल हार्डकोर इस्लामिस्ट होने के साथ तानाशाह जिया-उल-हक के अनुयायी है। जनरल जिया-उल-हक का नाम सुनते ही पूर्व पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो और जुलाई 1977 में हुए पाकिस्तानी तख्तापलट की याद आती है। कैसे जिया-उल-हक ने व्यक्तिगत नीति को अपनाते हुए भुट्टो को सत्ता से उखाड़ फेंका था। अब Asim Munir भी उसी लाइन पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ISI और सेना की कमान संभालने वाले आसिम मुनीर पर आरोप है कि वो नीजि हित के लिए समूचे पाकिस्तान को जोखिम में डाल रहा है।

वैसे पाकिस्तान के लिए ये कुछ नया नहीं है और Asim Munir की कथित कोशिश से पहले तीन ऐसे जनरल रहे हैं तो जिन्होंने तख्तापलट को बखूबी अंजाम दिया है। इसमें 1958 में मुहम्मद अयूब खान ने राष्ट्रपति इस्कंदर अली मिर्ज़ा को उखाड़ फेंका फिर 1977 में जनरल जिया-उल-हक और 1999 में परवेज मुशर्रफ की बारी आती है। दावा किया जा रहा है कि आसिम मुनीर अब अपनी कट्टरपंथ नीतियों के तहत पाकिस्तान को जोखिम में डालकर तख्तापलट की साजिश रच रहे हैं। ऐसे में आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि जिया-उल-हक का ये अनुयायी जनरल, Pakistan के लिए वरदान है या अभिशाप।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद निशाने पर कट्टरपंथी जनरल आसिम मुनीर

फौरी तौर पर भारत ने पहलगाम का बदला लेते हुए पाकिस्तान में हाहाकार मचा दिया है। 7 मई को तड़के सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में घुसकर ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देते हुए आतंकियों के 9 अड्डे नेस्तनाबूद कर दिए। मसूद अजहर से लेकर रऊफ अजहर तक जैसे आतंकी बर्बाद हो गए। इसके बाद पाकिस्तानी आवाम के निशाने पर Asim Munir आ गया जिसके दिशा-निर्देश में पाकिस्तानी सेना कदम-ताल कर रही है। पाकिस्तानी आवाम के साथ हुक्मरानों ने भी दोष आसिम मुनीर के मत्थे मढ़ दिया और मुल्क की बर्बादी का श्रेय उसे दे रहे हैं। फिलहाल Operation Sindoor के बाद तनावपूर्ण स्थिति जारी है और कट्टरपंथी आसिम मुनीर को लेकर तमाम तरह की चर्चाए हो रही हैं।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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