Bangladesh Elections 2026: तमाम सियासी उठा-पटक का केन्द्र रहे बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। उससे पहले अल्पसंख्यक हिंदुओं पर सबकी नजरें टिकीं हैं। दरअसल, बांग्लादेश में दिसंबर के अंतिम सप्ताह से अब तक करीब 10 हिंदुओं की निर्मम तरीके से हत्या हो चुकी है। इसी चुनावी दौर के बीच जमात-ए-इस्लामी पार्टी के मुखिया शफीकुर रहमान हिंदुओं को रिझाते नजर आए हैं।
शफीकुर रहमान ने कहा है कि हम अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक के आधार पर विभाजन का समर्थन नहीं करते। ये दर्शाता है कि कैसे जिस मुल्क में कुछ दिनों पहले हिंदुओं को निशाना बनाया गया, वहीं एक नेता चुनाव से पहले अपने पत्ते फेंक रहा है। खैर आइए हम आपको पूरे प्रकरण की जानकारी विस्तार से देते हैं।
क्या Bangladesh Elections 2026 से पहले अल्पसंख्यकों को रिझाने की कोशिश में जुटी जमात-ए-इस्लामी पार्टी?
बीएनपी के समक्ष ताल ठोंक रही जमात-ए-इस्लामी पार्टी क्या बांग्लादेशी अल्पसंख्यक हिंदुओं को रिझाने में जुटी है। दरअसल, ये सवाल पार्टी प्रमुख शफीकुर रहमान की एक प्रतिक्रिया के बाद सामने आए हैं।
VIDEO | Dhaka: On the condition of minorities in Bangladesh, Shafiqur Rahman, head of the Islamist Jamaat-e-Islami party, said, “Regardless of their religion, they are all Bangladeshi citizens. There are no second-class citizens in my country. India is our nearest neighbor, and… pic.twitter.com/tgLWscrALQ
— Press Trust of India (@PTI_News) February 11, 2026
शफीकुर रहमान ने ढ़ाका में मीडिया से बात करते हुए कहा कि “उनका धर्म चाहे जो भी हो, वे सभी बांग्लादेशी नागरिक हैं। मेरे देश में कोई भी दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं है। भारत हमारा सबसे करीबी पड़ोसी है और वह हमारी प्राथमिकता रहेगा। मैं किसी को भी अल्पसंख्यक नहीं मानता। हम सभी बांग्लादेशी हैं और हर कोई प्रथम श्रेणी का नागरिक है। हम अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक के आधार पर विभाजन का समर्थन नहीं करते।”
जमात-ए-इस्लामी पार्टी के प्रमुख की बदली बोली चुनावी नजदीकी का कारण तो नहीं। कहीं शफीकुर रहमान राज्य की कुल आबादी के 7.65 फीसदी हिंदुओं का समर्थन हासिल करने को बेताब तो नहीं हैं? ऐसे तमाम सवाल हैं जो शफीकुर रहमान की प्रतिक्रिया के बाद उठ रहे हैं।
12 फरवरी को बांग्लादेश में संपन्न होंगे आम चुनाव
आगामी कल का दिन बांग्लादेश के इतिहास में दर्ज होने जा रहा है। 12 फरवरी को बांग्लादेश की आवाम अपने हुक्मरान का चयन करेगी। बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी, जमात-ए-इस्लामी पार्टी की छत्रछाया में कई छोटे-बड़े राजनीतिक दल चुनावी मैदान में है। ये चुनाव इस लिहाज से भी खास है क्योंकि 2024 (अगस्त) में हुए तख्तापलट के बाद मुल्क में बड़े पैमाने पर अराजकता हुई।
दिसंबर 2025 से अब तक 10 से अधिक हिंदू मारे जा चुके हैं। उससे पहले मुल्क आर्थिक तंगी की मार झेल रहा है। ऐसे में ये चुनाव बांग्लादेशी आवाम के लिए बेहद खास है। अब देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी फैसला किसके हक में जाता है और कौन ढ़ाका की सत्ता संभालता है।






