S Jaishankar: यूएस-इजरायल-ईरान युद्ध के दौरान भारत भी काफी चर्चाएं हो रही है। दरअसल भारत की तरफ से ईरान के युद्धपोत IRIS लावन को कोच्चि में डॉक करने की इजाजत दी गई है। अब इसके लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। दरअसल रायसीना डायलॉग 2026 में बोलते हुए उन्होंने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। बता दें कि अमेरिकी ने ईरान के युद्धपोत को हिंद महासागर में निशाना बनाया था। जिसे लेकर भारत के विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा था। गौरतलब है कि यूएस-इजरायल-ईरान युद्ध भीषण होता जा रहा है। इसी बीच अब विदेश मंत्री ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
ईरान के युद्धपोत IRIS को भारत ने डॉक करने की दी इजाजत
रायसीना डायलॉग 2026 में बोलते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि “मैं भी UNCLOS और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करता हूँ। हमें ईरान की तरफ से एक संदेश मिला कि एक जहाज, जो संभवतः उस समय हमारी सीमाओं के सबसे करीब था, हमारे बंदरगाह में आना चाहता था। वे बता रहे थे कि उन्हें कुछ समस्याएँ आ रही हैं। 1 मार्च को हमने उन्हें अंदर आने की अनुमति दे दी और उन्हें आने में कुछ दिन लग गए, फिर वे कोच्चि में रुके, उनमें कई युवा कैडेट थे।
#WATCH | Raisina Dialogue 2026 | EAM Dr S Jaishankar says, “I too support UNCLOS and international law… We got a message from the Iranian side that one of the ships, which presumably was closest to our borders at that point of time, wanted to come into our port. They were… pic.twitter.com/CujBWJkXIL
— ANI (@ANI) March 7, 2026
जब जहाज रवाना हुए थे और जब वे यहाँ पहुँचे, तो स्थिति बिल्कुल अलग थी। वे बेड़े की समीक्षा के लिए आ रहे थे और फिर वे एक तरह से घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए। जाहिर है, श्रीलंका में भी एक जहाज के साथ ऐसी ही स्थिति हुई थी, उन्होंने जो निर्णय लिया, दुर्भाग्य से उनमें से एक जहाज बच नहीं पाया। हमने कानूनी मुद्दों से परे मानवता के दृष्टिकोण से स्थिति का सामना किया और मुझे लगता है कि हमने सही काम किया”।
ईरानी युद्धपोत हमले पर क्या होले एस जयशंकर
एस जयशंकर ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “इस विषय पर सोशल मीडिया पर काफी बहस चल रही है। कृपया हिंद महासागर की वास्तविकता को समझें। डिएगो गार्सिया पिछले पांच दशकों से हिंद महासागर में मौजूद है। जिबूती में विदेशी सेनाओं की मौजूदगी इस सदी के पहले दशक की शुरुआत में ही स्थापित हो गई थी। हंबनटोटा का उदय भी इसी दौरान हुआ। डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में एक छोटा-सा कोरल (प्रवाल) द्वीप/एटोल स्थित है। यह द्वीप चागोस द्वीपसमूह का हिस्सा और ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह रणनीतिक सैन्य अड्डा है जहाँ से अमेरिका ने कई ऑपरेशन सपोर्ट किए। यही कारण है कि अमेरिका ने ईरान के जहाज पर हमला किया था।






