US-Iran War: मीडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव पूरी दुनिया की चिंता का कारण बन गया है। इस युद्ध से दुनिया के कई देशों की टेंशन बढ़ गई है। बता दें कि अमेरिका लगातार ईरान पर ताबड़तोड़ हमला कर रहा है। जॉर्डन में ईरानी मिसाइल हमलों में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद, अमेरिकी सेना ने पूरे ईरान में IRGC के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू कर दिए हैं। अभी 30 से ज़्यादा अमेरिकी लड़ाकू विमान ईरान में IRGC के ठिकानों पर हमला कर रहे हैं। वहीं ईरान की तरफ से साफ तौर पर कह दिया गया है कि समझौता खत्म हो चुका है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
अमेरिका के हमले से दहला ईरान
यू.एस. सेंट्रल कमांड ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा कि “आज शाम 6 बजे ET पर, कमांडर-इन-चीफ़ के आदेश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के ख़िलाफ़ नए हवाई हमले शुरू किए।
Today at 6 p.m. ET, U.S. forces began launching new airstrikes against Iran at the Commander in Chief’s direction. The strikes are designed to further degrade Iran’s ability to threaten commercial shipping in the Strait of Hormuz and swiftly punish Islamic Revolutionary Guard…
— U.S. Central Command (@CENTCOM) July 18, 2026
इन हमलों का मकसद होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल शिपिंग के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को और कम करना है, और साथ ही उन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) बलों को तुरंत सज़ा देना है जिन्होंने कल रात जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमले किए थे”।
तीसरे विश्व युद्ध की आहट तेज
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के साथ ही कई वैश्विक शक्तियां भी इस संकट पर नजर बनाए हुए हैं। यदि संघर्ष में अन्य देश प्रत्यक्ष रूप से शामिल होते हैं, तो क्षेत्रीय युद्ध का दायरा बढ़ सकता है। इसी वजह से सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में तीसरे विश्व युद्ध की संभावना जताई जा रही हैं। मालूम हो कि ना ही अमेरिका और ना ही ईरान दोनों मानने को तैयार नहीं है। दोनों की तरफ से लगातार हमले जारी है। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े होना शुरू हो गए है, कि क्या तीसरे विश्व युद्ध शुरू हो सकता है या फिर अमेरिका ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है।
भारत पर क्या होगा प्रभाव?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में मध्य पूर्व में लंबे समय तक तनाव रहने पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा, क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी सरकार की प्राथमिकता बनी रहेगी। साथ ही पेट्रोल-डीजल एलपीजी के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है।







