US-Iran War: ईरान की मांग से तिलमिलाया अमेरिका, क्या भीषण युद्ध के आगे बढ़ रहे है दोनों देश, जानें सबकुछ

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। जिससे युद्ध की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

US-Iran War

फाइल फोटो

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। इसके अलावा भारत समेत दुनिया के कई देशों की टेंशन बढ़ गई है। मालूम हो कि ईरान ने पहले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का आदेश दे दिया था। अब इस खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ही वह समुंद्री रास्ता है जिससे होकर कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य नेचुरल गैस जहाज से अपने गंतव्य तक जाते है।

अगर यह होर्मुज ज्यादा दिन तक बढ़ता है तो कई देशों में एनर्जी संकट गहरा सकता है। ईरान ने साफ कह दिया है कि वह झुकने के लिए तैयार नहीं है। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।

ईरान का मांग से आगबबूला हुआ अमेरिका

ईरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह सामान्य करने से पहले अमेरिका को अपने रवैये में बदलाव करना होगा। तेहरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देना और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य दबाव कम करना शामिल है। ईरान के लिए होर्मुज सिर्फ समुद्री रास्ता नहीं बल्कि बातचीत में एक बड़ा रणनीतिक हथियार बन चुका है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए यह जलमार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। यहां लंबे समय तक किसी तरह की बाधा बनी रहने से तेल और गैस की सप्लाई के साथ-साथ वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ सकता है।

क्या दोनों देशों के बीच होगा भीषण युद्ध?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ईरान की इन शर्तों को आसानी से स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहा। यूएस चाहता है कि जलमार्ग में इंटरनेशनल जहाजों की आवाजाही सामान्य और निर्बाध हो। अमेरिका की ओर से नाकाबंदी हटाने और समुद्री यातायात को लेकर बातचीत के संकेत जरूर मिले हैं। हालांकि इससे पहले भी सीजाफर के बाद भी अमेरिका ने ईरान पर भीषण हमला किया था। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बातचीत नाकाम होने पर अमेरिका और ईरान के बीच भीषण युद्ध हो सकता है। गौरतलब है कि दोनों देश झुकने के लिए तैयार नहीं है।

सबसे बड़ी बात है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। अगर यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी क्षेत्र से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने पर दुनिया के कई देशों में तेल की कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

 

 

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