US Israel Iran War: अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर लगातार हमला कर रहे है। हालांकि ईरान की तरफ से भी इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जो मीडिल ईस्ट में है, उनपर लगातार हमले किए जा रहे है। बता दें कि इस युद्ध ने दुनिया के कई देशों की टेंशन बढ़ा दी है। जिसमे भारत भी शामिल है। मालूम हो कि ईरान कच्चे तेल का बड़ा निर्यातक है। गौरतलब है कि इस युद्ध से तीसरे विश्व युद्ध के साथ-साथ एक बड़ी टेंशन यह भी है कि क्या इस लड़ाई से भारत की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ने वाला है। आसान भाषा में समझे तो सात समंदर पार चल रहे इस लडा़ई से कई देशों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा सकती है। आईए समझते है कि इससे भारत पर क्या असर पड़ने वाला है?
मीीडिल ईस्ट में उथल-पुथल के बीच भारत की बढ़ेगी टेंशन
भारत तीन सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, और उसकी करीब 85-90% तेल ज़रूरतें आयात पर निर्भर हैं। लगभग 50% तेल आपूर्ति सीधे होर्मुज़ से आती है — अगर वह मार्ग बाधित होता है, तो भारत को महंगा तेल, अधिक फ़्रेट (शिपिंग) खर्च और इंश्योरेंस प्रीमियम देना पड़ सकता है। इसका मतलब है: तेल महँगा होने से भारत का व्यापारिक घाटा बढ़ सकता है।
मध्य पूर्व तनाव और तेल कीमतों की बढ़त ने पहले भी रुपये को कमजोर किया है — महामारी के बाद रुपये ने तीन महीने के निचले स्तर को छुआ है।बढ़ते तेल की कीमतें और उभरते जोखिम से डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बन सकता है, जिससे INR गिर सकता है और महंगाई बढ़ सकती है।
बताते चले कि भारत इजरायल से बड़ी मात्रा हथियार खरीदता है। जिसमे ड्रोन, मिसाइल डिफेंस सिस्टम आदि शामिल है। गौरतलब है कि अगर युद्ध लंबे समय तक खीचता है तो भारत को होने वाली रक्षा उपकरणों की डिलीवरी और स्पेयर्स पार्ट्स की आपूर्ति देरी से हो सकती है।
माना जा रहा है कि अगर युद्ध ज्यादा दिन तक चलता है तो तेल महंगा हो सकता है,, इसके अलावा ट्रांसपोर्ट, सामान की लागत बढ़ेगी. जिससे खाद्य पदार्थ, सब्जियां, दूध, FMCG सब पर असर पड़ सकता है। अनिश्चितता बढ़ने पर विदेशी निवेशक पैसा निकाल सकते हैं। सेंसेक्स और निफ्टी में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण ऊर्जा संचलन बिंदु है जिससे होकर वैश्विक पेट्रोलियम तरल का लगभग 20% और वैश्विक द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का 20% गुजरता है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच भीषण हुई जंग
अमेरिका और इज़राइल के लगातार हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मारे गए हैं।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने बदला लेने की कसम खाई है और कहा है कि उसने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले 27 ठिकानों के साथ-साथ तेल अवीव में इज़राइली सैन्य सुविधाओं पर हमले किए हैं। कतर और संयुक्त अरब अमीरात में भी विस्फोटों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। माना जा रहा है कि ये युद्ध और भीषण रूप ले सकता है।






