Malad Viral Video: महाराष्ट्र के मलाड से एक डरा देने वाला मामला सामने आया है। यहां पर दो फल व्यापारियों को फलों के अंदर चूहे मारने की दवाई रेटोल मिलाते हुए पकड़ा गया है। उनका कहना है कि, फल चूहे खराब कर देते हैं इसीलिए ऐसा कर रहे हैं। इस मामले में प्रशासन ने बड़ा एक्शन लेते हुए दो दुकानदार मनोज कुमार केसरवानी और बिपिन केसरवानी को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही उनकी दुकान को भी सील कर दिया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।इस खबर ने लोगों के अंदर डर का माहौल पैदा कर दिया है। लेकिन क्या आपको पता है? चूहे मारने की दवा रेटोल कितनी खतरनाक होती है? ये इंसानी शरीर को कितना प्रभावित करती है?
Malad Viral Video: फलों में लगा रेटोल शरीर में चला जाए तो क्या करता है?
आपको बता दें, चूहे मारने की दवा रेटोल एक बहुत ही खतरनाक जगह है। इसे येलो फास्फोरस के नाम से जाना जाता है। अगर इंसानी शरीर में ये चला जाए तो किडनी, लिवर और हार्ट को सीधे प्रभावित करता है।
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अगर फलों या फिर किसी भी जरिए रेटोल इंसानी शरीर में चला जाए तो सबसे पहले अंगों को फेल करता है। ये एक्यूट लिवर फेलियर का प्रमुख कारण बनता है। इसकी 1 mg प्रति किलोग्राम मात्रा किसी की भी जान ले सकती है। महाराष्ट्र के मलाड में जिस तरह से दुकानदार ये जहर फलों में मिलाकर लोगों को बेच रहे थे। उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि, ये कितना जानलेवा है।
चूहे मार दवा रेटोल शरीर में जाने के बाद लक्षण
रेटोल जब इंसानी शरीर में जाती है तो शरीर पर कुछ लक्षण दिखने लगते हैं। ये शरीर के अंदर जाने के 1 से 8 घंटे में असर करता है। इस दौरान कुछ लक्षण दिखते हैं।
1-पेट तेज दर्द के साथ उल्टियां और दस्त का आना।
2-तेज बुखार के साथ बार-बार प्यास लगना।
3-सीने में तेज दर्द और जलन के साथ सांस लेने में परेशानी होना।
4-72 घंटे बाद अचानक से शरीर के अंग फेल हो सकते हैं। इसके साथ ही पीलिया और दिमागी भ्रम पैदा हो सकता है।
चूहे मार दवा रेटोल अगर शरीर के अंदर चली जाए तो क्या करें?
1-अगर किसी कारण वश चूहे मार दवा रेटोल शरीर में चली जाए तो कुछ इमरजेसी काम करके मरीज की जान बचाई जा सकती है।
2-डॉक्टर के आने से मरीज को उल्टी ना कराएं । इससे फेफड़े और शरीर के अंन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।
3-भूलकर भी मरीज को दूध, घी और तेल ना पिएं। ये फैट वाली चीजों से शरीर में बहुत जल्द फैलता है।
4-मरीज को सोने ना दें , उसे करवट से लिटाकर रखें।
5-मरीज को अगर सांस लेने में परेशानी हो रही है तो सीपीआर दे सकते हैं।
6-मरीज को 3 से 5 दिन तक डॉक्टर की निगरानी में रखें। क्योंकि ये जहर 72 घंटे बाद भयंकर रुप लेता है।






