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Electric Car: EV खरीदी, 2 साल बाद बेची, 50% Value गिरी! क्यों है EV की Resale Value कम? जानिए ईवी रीसेल मार्केट की सच्चाई

Electric Car: आजकल लोग इलेक्ट्रिक कार खरीदते हैं, और फिर 2 साल बाद उसे बेच देते हैं। खरीदारों को कार की आधी कीमत भी नहीं मिल रही है। ऐसे में इसके पीछे के क्या कारण हैं।

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By: Amit Mahajan

Published: फ़रवरी 2, 2026 3:53 अपराह्न

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Electric Car: एक टाइम था, जब इंडिया में इलेक्ट्रिक कार का चलन काफी अधिक बढ़ गया था। मगर अब इसमें ब्रेक लग गया है और नई कार खरीदने वाले लोग ईवी वाहन खरीदने से बच रहे हैं। बीते साल भी इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में कुछ खास उछाल देखने को नहीं मिला है। ऐसे में कई रिपोर्ट्स में यही दावा किया गया है कि जो लोग इलेक्ट्रिक कार पर भरोसा दिखा रहे हैं, वो उसे खरीदने के बाद पछता रहे हैं। ईवी खरीदार बहुत ही कम समय में अपनी नई इलेक्ट्रक कार को आधे से भी कम दाम पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं।

Electric Car की 50% तक गिर रही है वैल्यू, आखिर क्यों?

अगर आपके पास फ्यूल यानी पेट्रोल वाली कार है, तो आप जानते होंगे कि कार का इंजन खराब होने के बाद उसे ठीक करवाया जा सकता है। साथ ही गाड़ी का गियरबॉक्स में कुछ भी गड़बड़ी होने की स्थिति में भी उसे रिपेयर करवा सकते हैं। मगर इलेक्ट्रिक कार के मामले में ऐसा नहीं है। इलेक्ट्रिक कार की बैटरी खराब होने के बाद कार की वैल्यू 30 से 45 फीसदी तक कम हो जाती है। ऐसे में खरीदारों के पास 2 विकल्प होते हैं। पहला बैटरी बदली जाए, जोकि काफी महंगी पड़ती है। दूसरी तरफ, बैटरी नहीं बदलने पर यह शंका रहती है कि बैटरी कब तक चलेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

इलेक्ट्रिक कार की तुलना में पुरानी पेट्रोल कार की वैल्यू ज्यादा क्यों?

पेट्रोल कार की वैल्यू 3 साल में 70 फीसदी रह जाती है। मगर इलेक्ट्रिक कार की 3 साल में वैल्यू 45 प्रतिशत रह जाती है। पेट्रोल कार में इंजन खराब होने पर उसे ठीक करवाकर 5 साल तक चलाया जा सकता है। दूसरी तरफ, इलेक्ट्रिक कार की बैटरी खराब हो गई, तो फिर उसे ठीक करवाने का रिस्क अधिकतर खरीदार नहीं उठाते हैं। लोगों में बैटरी की लाइफ को लेकर डर बना रहता है। इलेक्ट्रिक कार की बैटरी की वारंटी खत्म होते ही कार की वैल्यू काफी कम रह जाती है।

ईवी में बैटरी डिग्रेडेशन, टेक्नोलॉजी का पुराना होना, जानें ईवी रीसेल मार्केट की सच्चाई

अगर आपने इलेक्ट्रिक कार खरीद ली है, तो आपको इस बात का डर रहेगा कि जैसे-जैसे बैटरी चार्ज होगी, वैसे-वैसे बैटरी की डिग्रेडेशन होगी। एक टाइम पर बैटरी की क्षमता कम होकर 70 फीसदी रह जाती है। ऐसे में ईवी वाहन में 3 सालों के दौरान रेंज में 20 फीसदी तक की कमी आती है।

साल 2021 में इलेक्ट्रिक कारों की औसत रेंज 250 से 300 किलोमीटर थी, 2023 में 400 किलोमीटर और साल 2025 में 500 किलोमीटर से अधिक रेंज मिलने लगी है। ऐसे में ईवी कार खरीदार पुरानी की बजाय नई इलेक्ट्रिक कार को अधिक तवज्जों देते हैं। वहीं, ईवी रीसेल मार्केट की बात करें, तो इंडिया में खरीदारों की सीमित संख्या है। ईवी की बैटरी ग्रेडिंग की कमी, चार्जिंग स्टेशन की कमी और नई ईवी पर छूट और सब्सिडी भी मिलती है।

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Amit Mahajan

अमित महाजन DNP India Hindi में कंटेंट राइटर की पोस्ट पर काम कर रहे हैं.अमित ने सिंघानिया विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में डिप्लोमा किया है. DNP India Hindi में वह राजनीति, बिजनेस, ऑटो और टेक बीट पर काफी समय से लिख रहे हैं. वह 3 सालों से कंटेंट की फील्ड में काम कर रहे हैं.
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