Amit Shah: भारत के विकसित बनने की राह में एक बड़ा अड़ंगा नक्सलवाद भी है। यह देश को धीरे-धीरे अंदर से कमजोर कर देता है। नक्सल के खिलाफ पिछले कई सालों से चली आ रही जंग अब अपना रंग दिखा रही है। देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को बड़ी जानकारी देते हुए अच्छी खबर दी। बीजेपी के सीनियर लीडर अमित शाह ने कहा, ‘देश से माओवादी खतरे का साया हट गया है और उनका आखिरी गढ़, छत्तीसगढ़ का बस्तर, अब “विकास के रास्ते” पर आगे बढ़ रहा है।’ देश में माओवादी हिंसा को पूरी तरह खत्म करने के लिए भारत सरकार ने 31 मार्च की समय सीमा तय की है और इसी के मद्देनजर लोकसभा में इस विषय पर चर्चा हुई।
अमित शाह ने संसंद में दी देशवासियों को खुशखबरी
लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा, ‘देश में अब नक्सलवाद खत्म होने की कगार पर है, जब यह पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो जाएगी, तब देश को इसकी जानकारी दी जाएगी, लेकिन मैं यह कह सकता हूं कि हम नक्सल-मुक्त हो चुके हैं।’
उन्होंने आगे कहा, ‘नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब लद गए हैं। नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं, बल्कि वामपंथी विचारधारा है, जिसे 1969 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए इंदिरा गांधी ने स्वीकार कर लिया था। नक्सलियों ने गांवों में स्कूल, दवाखाने और बैंक जला दिए, फिर लोगों को बरगला कर बोलते थे कि विकास नहीं पहुंचा। गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, नक्सलवाद के कारण गरीबी फैली।’
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘कम्युनिस्ट पार्टी अन्याय का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि हमारी संसदीय प्रणाली का विरोध करने के लिए बनी। जिस कम्युनिस्ट पार्टी की नींव ही दूसरे देश की विचारधारा से प्रेरित हो, वह भारत का भला कैसे करेगी? माओवादियों ने रेड कॉरिडोर भेदभाव का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि सरकार की पहुंच कम होने के कारण चुना था। वामपंथी विचारधारा के समर्थकों ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद भगत सिंह या सुभाष चंद्र बोस को नहीं, बल्कि “MAO” को अपना आदर्श माना।’
नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब लद गए हैं। pic.twitter.com/HQPw9tNLpC
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चाहे नक्सलियों से मिलना हो, या उनका समर्थन करना हो, राहुल गांधी हमेशा नक्सलियों के साथ खड़े दिखते हैं। pic.twitter.com/ja7hos72Ef
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अमित शाह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने विरोधियों पर कड़ा जुबानी वार करते हुए कहा, ‘यह मोदी सरकार है, जो हथियार उठायेगा, उसे हिसाब देना पड़ेगा। लाल आतंक की परछाई थी, इसलिए बस्तर विकास से पिछड़ गया था। लाल आतंक की परछाई हट गई, अब बस्तर विकसित हो रहा है। वामपंथी विचारधारा का ध्रुव वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ नहीं, बल्कि यह है कि सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। मोदी सरकार डरने वाली नहीं, बल्कि सबके साथ न्याय करने वाली सरकार है। चाहे नक्सलियों से मिलना हो, या उनका समर्थन करना हो, राहुल गांधी हमेशा नक्सलियों के साथ खड़े दिखते हैं।’
उन्होंने आगे कहा, ‘नक्सलियों के कारण हुए नरसंहार में नक्सलियों के समर्थक भी उतने ही भागीदार हैं, जितने हिंसा करने वाले हैं। सोनिया गांधी की अध्यक्षता में बनी NAC में नक्सल समर्थक भरे पड़े थे। वामपंथी विचारधारा अपना आधार खो बैठी है, इसलिए सारे वामपंथी अलग-अलग थ्योरी रच-रचकर अपने अस्तित्व को बचाने में लगे हैं। एक समानांतर सरकार और न्याय व्यवस्था चलाकर आदिवासियों का शोषण करने वाले नक्सली लोकतंत्र के घोर विरोधी हैं। सत्ता के समर्थन के बिना देश के बीचों-बीच, तिरुपति से लेकर पशुपतिनाथ तक, रेड कॉरिडोर संभव ही नहीं था।’
