CJP Protest: आज शुक्रवार का दिन कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) के लिए खास रहा। देश की राजधानी नई दिल्ली में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास स्थित विट्ठल हाउस में सीजेपी और केंद्रीय सरकार के बीच एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में सीजेपी की ओर से आशुतोष रांका व सौरव दास रहे, जबकि केंद्र की मोदी सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मौजूद रहे। जिसमें छात्रों की तरफ से कॉकरोज जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ताओं ने सरकार के सामने अपनी तीन मांगों को एक बार फिर से दोहराया। जिनमें से दो मांगों को केंद्र सरकार ने मान ली है। जबकि एक मांग पर मोदी सरकार की तरफ से अबतक सहमति नहीं मिली है।
सरकार और सीजेपी के बीच बैठक में क्या-क्या हुआ?
दरअसल, आज यानी शुक्रवार (24 जुलाई, 2026) को दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास वीपी हाउस में केन्द्र सरकार और कॉकरोज जनता पार्टी के बीच करीब 45 मिनट तक चली इस अहम बैठक में सीजेपी की बड़ी मांगों पर चर्चा हुई है। इसमें सीजेपी की ओर से केन्द्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी गईं। जिनमें दूसरी और तीसरी शर्त को मोदी सरकार ने मान ली है। इसे ऐसे समझे कि केंद्रीय सरकार ने सीजेपी प्रतिनिधियों की तीन में से दो मांगों को मान लिया है। जिसमें आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने और आंदोलन करने वाले छात्रों के खिलाफ कानून कार्रवाई न करने की मांग की गई है, लेकिन पहली मांग पर अब तक सरकार की तरफ से सहमति अब तक नहीं मिली है।
बताया जा रहा है कि कॉकरोज जनता पार्टी की ओर से पहली मांग में सरकार से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई है। इन सबके बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन को नेतृत्व कर रही सीजेपी की ओर से दावा किया गया है कि केन्द्र की मोदी सरकार ने अन्य मांग पर जवाब देने के लिए शनिवार यानी कल दोपहर तक का समय मांगा है।
क्या सच में धर्मेंद्र प्रधान देंगे इस्तीफा?
देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर बीते कई दिनों से पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। इसका नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी कर रही है। सीजेपी लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसके अलावा अब देश की प्रमुख विपक्षी दल केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा है। इन सबके बीच केन्द्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच बातचीत का दौर चल रहा है। पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की संभावना अबतक बहुत कम दिखती नजर आ रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि सूत्र बताते हैं कि इस्तीफा देना सबसे आसान काम होगा और यह जिम्मेदारी से भागने जैसा होगा। ऐसे में सिस्टम में रहकर चीजों को ठीक करना बेहतर साबित हो सकता है।
राजनीतिक दबाव के बावजूद मोदी सरकार मजबूत
साल 2014 से लेकर अबतक मोदी सरकार की राजनीतिक शैली पर ध्यान आकर्षित करें तो यह सच है कि राजनीतिक प्रेशर में मंत्रियों के इस्तीफे के बहुत कम मामले देखने को मिले हैं। मालूम हो कि अब तक, राज्य मंत्री एम.जे. अकबर को छोड़कर, शायद ही किसी मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी के चलते अपने पद से इस्तीफा दिया हो। कोविड-19 महामारी के दौरान, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के विरोध में इस्तीफे की मांग हुई थी।
आगे एपस्टीन फाइल स्कैंडल के बाद, हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से छाया रहा। इतना ही नहीं, आगे चलकर देशभर में किसानों के द्वारा कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के इस्तीफे की भी मांग की गई थी। रेल हादसे के बाद, अश्विनी वैष्णव के इस्तीफे की भी मांग चर्चा में रही। हालांकि, इनमें से किसी भी केंद्रीय मंत्री ने तुरंत दबाव में आकर इस्तीफा नहीं दिया। कुल मिलाकर कहा जाए तो ऐसा लगता है कि केन्द्र की मोदी सरकार राजनीतिक दवाब के आगे झुकने में विश्वास नहीं करती है।







