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Amitabh Kant: दमघोंटू हवा को लेकर SC पर भड़क उठे नीति आयोग के पूर्व चेयरमैन! गैस चैंबर बनी दिल्ली-एनसीआर को बचाने के लिए सुझाया उपाय

नीति आयोग के पूर्व अध्यक्ष Amitabh Kant ने राजधानी की ताजा हालात को लेकर कुछ सुझाव पेश किए हैं। अमिताभ कांत ने बताया है कि कैसे दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति से निपटा जा सकता है।

By: Gaurav Dixit

On: मंगलवार, अक्टूबर 21, 2025 4:45 अपराह्न

Amitabh Kant
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Amitabh Kant: प्रकाश पर्व दिवाली के बाद राजधानी दिल्ली फिर एक बार गैस चैंबर बन गई है। सुबह की शुरुआत धुंध के साथ ही जिसको लेकर तमाम लोगों ने सरकारी इंतजामों पर तल्ख प्रतिक्रिया दी है। इसी कड़ी में नीति आयोग के पूर्व चेयरमैन अमिताभ कांत भी सुप्रीम कोर्ट पर तल्ख नजर आए। अमिताभ कांत ने सुप्रीम कोर्ट पर तंज कसते हुए तल्ख भाव में प्रतिक्रिया दी।

उनका कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखे जलाने के अधिकार को जीने और साँस लेने के अधिकार से ऊपर रखने का आरोप लगाया। पूर्व नीति आयोग अध्यक्ष ने राजधानी में एक्यूआई की ताजा हालात के लिए सभी जिम्मेदार संस्थाओं को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने दिल्ली को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बताते हुए प्रदूषण नियंत्रण के कुछ उपाय सुझाए हैं जिसके बारे में हम आपको विस्तार से बताएंगे।

गैस चैंबर बनी दिल्ली-एनसीआर को बचाने के लिए Amitabh Kant ने सुझाया उपाय

नीति आयोग के सीईओ रहे अमिताभ कांत ने कुछ उपाय सुझाते हुए राजधानी दिल्ली की ताजा हालात पर सवाल उठाए हैं।

अमिताभ कांत के एक्स हैंडल से पोस्ट जारी कर लिखा गया है कि “दिल्ली की वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। 36/38 निगरानी केंद्र ‘रेड ज़ोन’ में पहुंच गए हैं और प्रमुख इलाकों में AQI 400 से ऊपर है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी समझदारी से पटाखे जलाने के अधिकार को जीने और साँस लेने के अधिकार से ऊपर रखा है। दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानियों में से एक बनी हुई है। अगर लॉस एंजिल्स, बीजिंग और लंदन ऐसा कर सकते हैं, तो दिल्ली क्यों नहीं? केवल निर्मम और निरंतर कार्यान्वयन ही दिल्ली को इस स्वास्थ्य और पर्यावरणीय आपदा से बचा सकता है।”

आगे उपाय का जिक्र करते हुए अमिताभ कांत लिखते हैं कि “प्रदूषण नियंत्रण के लिए एकीकृत कार्य योजना जरूरी है। फसल और बायोमास जलाना बंद करना, ताप विद्युत संयंत्रों और ईंट भट्टों को स्वच्छ तकनीक से बंद करना या आधुनिक बनाना, 2030 तक सभी परिवहन को बिजली से चलाना, निर्माण धूल नियंत्रण को सख़्ती से लागू करना, कचरे प्रसंस्करण सुनिश्चित करना और दिल्ली को हरित, पैदल चलने योग्य बनाना। केवल ऐसा निर्णायक और अथक कार्यान्वयन ही शहर के नीले आसमान और साँस लेने योग्य हवा को बहाल कर सकता है।”

पूर्व नौकरशाह अमिताभ कांत की इस प्रतिक्रिया को लेकर अब तमाम खबरें बन रही हैं।

दिवाली के बाद दमघोंटू हुई राजधानी की हवा

मालूम हो कि राजधानी दिल्ली में दिवाली के ठीक बाद हवा दमघोंटू हो गई है। आलम ये हुआ आज सुबह तमाम लोग मास्क लगाकर यात्रा करते नजर आए। कई सियासी सख्सियतों और कलाकारों समेत सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राजधानी की बदहाल स्थिति को लेकर सवाल उठाया है। आनंद बिहार से लेकर अक्षरधाम, लक्ष्मी नगर, मुखर्जी नगर, चांदनी चौक, कुतुब मिनार, साकेत बिहार, लोधी रोड, सफदरगंज समेत अन्य तमाम इलाकों में लोगों को आज सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई जिसको लेकर खूब हो-हल्ला देखने को मिला।

Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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