---Advertisement---

Electoral Bonds: चुनावी बॉन्ड योजना क्यों की गई रदद, सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी का किस पर कितना पड़ेगा असर

Electoral Bonds: सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने चुनावी बॉन्ड योजना को रदद कर दिया। आपको बता दें कि चुनावी बॉन्ड राजनीतिक दलों को गुमनाम दान की अनुमति देती थी। इस योजना को सुप्रीम कोर्ट ने रदद कर दिया। आपको बता दें कि यह बहुप्रतीक्षित फैसला जो लोकसभा चुनाव के कुछ महीने पहले आया ...

Read more

Avatar of Anurag Tripathi

By: Anurag Tripathi

Published: फ़रवरी 16, 2024 12:01 अपराह्न | Updated: फ़रवरी 16, 2024 1:41 अपराह्न

Electoral Bond
Follow Us
---Advertisement---

Electoral Bonds: सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने चुनावी बॉन्ड योजना को रदद कर दिया। आपको बता दें कि चुनावी बॉन्ड राजनीतिक दलों को गुमनाम दान की अनुमति देती थी। इस योजना को सुप्रीम कोर्ट ने रदद कर दिया। आपको बता दें कि यह बहुप्रतीक्षित फैसला जो लोकसभा चुनाव के कुछ महीने पहले आया है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बांड योजना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करती है।

मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने वित्त अधिनियम का हवाला देते हुए 2017 के माध्यम से पेश की गई योजना को रदद करते हुए कहा कि मतदान विकल्प के प्रभावी अभ्यास के लिए राजनीतिक दलों को वित्तपोषण के बारे में जानकारी आवश्यक है।

क्या है Electoral Bonds?

Electoral Bonds धन उपकरण हैं जो वचन पत्र या वाहक बॉन्ड के रूप में कार्य करते हैं जिन्हें भारत में व्यक्तियों या कंपनियों द्वारा खरीदा जा सकता है। बॉन्ड विशेष रूप से राजनीतिक दलों को धन के योगदान के लिए जारी किए जाते हैं। आपको बताते चले कि  ये बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा जारी होते हैं, और 1000 हजार रूपये, 10000 हजार रूपये, 1 लाख रूपये, 10 लाख रूपये और 1 करोड़ रूपये के गुणकों में बेचे जाते हैं।

इस योजना के तहत कॉर्पोरेट और यहां तक ​​कि विदेशी संस्थाओं द्वारा दिए गए दान पर 100 प्रतिशत की कर छूट दी जाती है, जबकि दानदाताओं की पहचान गोपनीय रखी जाती है, बैंक और प्राप्तकर्ता राजनीतिक दलों दोनों द्वारा।

राजनीतिक दलों पर कितना पड़ेगा प्रभाव?

Electoral Bond
फाइल फोटो प्रतिकात्मक

Electoral Bonds योजना की हालिया समाप्ति से राजनीतिक दलों को अपने फंडिंग स्रोतों के संबंध में निर्णायक निर्णय का सामना करना पड़ रहा है, खासकर लोकसभा चुनाव 2024 के निकट आने के साथ। विशेष रूप से, भाजपा जैसी पार्टियां और तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, बीजेडी और वाईएसआरसीपी जैसे क्षेत्रीय पार्टी अपने वित्तीय समर्थन के लिए चुनावी बॉन्ड पर बहुत अधिक निर्भर हो गए थे। उदाहरण के लिए, ये बॉन्ड तृणमूल कांग्रेस की कुल प्राप्तियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे, जो वित्तीय वर्ष 2022-23 में आश्चर्यजनक रूप से 97 प्रतिशत था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने Electoral Bonds योजना को रदद कर दिया। चलिए आपको बताते है Electoral Bonds पर सुप्रीम कोर्ट की कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणी।

●बता दें कि Electoral Bonds योजना को असंवैधानिक करार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह योजना नागरिकों के सूचना के अधिकार का उल्लंघन करती है, जिससे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत स्वतंत्र भाषण और अभिव्यक्ति पर असर पड़ता है। राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता पूर्ण छूट देकर हासिल नहीं की जा सकती।

●सुप्रीम कोर्ट ने आयकर अधिनियम और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में किए गए संशोधनों को भी रद्द कर दिया, जिन्होंने दान को गुमनाम बना दिया था।

●सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस योजना को यह दावा करके  उचित नही ठहराया जा सकता है कि यह काले धन के प्रवाह को रोक सकती है।

दान कैसे किया जाता है?

आपको बता दें कि किसी राजनीतिक दल को दान देने के लिए केवाईसी खाते के माध्यम से बॉन्ड खरीदे जा सकते है। सबस दिलचस्प बात यह है कि  किसी व्यक्ति या कंपनी द्वारा खरीदे गए चुनावी बॉन्ड की संख्या की कोई  सीमा नही है। वहीं एक बार धन हस्तांतरित होने के बाद राजनीतिक दलों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर दान को भुनाना होता है।

Electoral Bonds के माध्यम से कौन धन प्राप्त कर सकता है?

योजना के प्रावधानों के अनुसार, केवल वे राजनीतिक दल जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29 ए के तहत पंजकृति है। वहीं जिन्हें पिछले लोकसभा या राज्य विधानसभा चुनावों में डाले गए वोटों को कम से कम 1 प्रतिशत वोट मिले हो, वह चुनावी बॉन्ड पाने के लिए योग्य है।

विपक्ष ने बीजेपी पर साधा निशाना

Electoral Bonds को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को एक अहम फैसला सुनाया। इसके बाद से ही विपक्ष ने बीजेपी पर निशाना साधना शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्श पर लिखा कि “नरेंद्र मोदी की भ्रष्ट नीतियों का एक और सबूत आपके सामने है।भाजपा ने इलेक्टोरल बॉन्ड को रिश्वत और कमीशन लेने का माध्यम बना दिया था। आज इस बात पर मुहर लग गई है”। गौरतलब है कि चुनावी बॉन्ड राजनीतिक दलों को गुमनाम दान की अनुमति देती थी। जिस योजना को सुप्रीम कोर्ट ने रदद कर दिया। 

नागरिकों पर इस फैसले का कितना पड़ेगा प्रभाव

कर कटौती संबंधी चिंताएं चुनावी बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने नागरिकों के बीच उन कर कटौती के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो उन्होंने 100 प्रतिशत कर कटौती की पेशकश वाली खरीद के तहत दावा किया होगा। आमतौर पर, अदालती फैसले और कर परिवर्तन घोषणा की तारीख के बाद प्रभावी होते हैं। इसलिए, नागरिकों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपनी कर कटौती पर फैसले के निहितार्थ के संबंध में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार करें।

Avatar of Anurag Tripathi

Anurag Tripathi

अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
For Feedback - feedback@dnpnewsnetwork.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

CM Yogi Adityanath

फ़रवरी 28, 2026

CM Yogi Adityanath

फ़रवरी 28, 2026

Delhi News

फ़रवरी 28, 2026

फ़रवरी 28, 2026

Israel Iran War

फ़रवरी 28, 2026

फ़रवरी 28, 2026