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Pongal 2026: ‘बिना शेयर किसी सेलिब्रेशन के नहीं है मायने…’ क्या है मकर संक्रांति और पोंगल त्योहार का सही अर्थ, गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने बताया

Pongal 2026: पोंगल और मकर संक्रांति जैसे त्योहार हम मनाते तो है लेकिन आखिर इसके मायने क्या है। इस बारे में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर बात करते हुए नजर आए हैं। आइए जानते हैं क्या है इस त्यौहार के सही मायने।

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By: Anjali Wala

Published: जनवरी 14, 2026 6:00 पूर्वाह्न

Pongal 2026
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Pongal 2026: 14 जनवरी का दिन काफी खास है क्योंकि जहां कुछ जगह पर पोंगल का त्यौहार मनाया जा रहा है तो कई जगह पर मकर संक्रांति का जश्न देखा जा रहा है। इस तक के बीच आखिर इन त्यौहार क्या क्या है सही अर्थ। साल का पहला त्यौहार पहले फसल को लेकर होती है जब हम इसका जश्न मनाते हैं। किसानों के लिए इन त्योहारों का काफी महत्व होता है क्योंकि पोंगल, मकर संक्रांति हो या लोहड़ी यह बिना शेयर किए नहीं हो सकता है। ऐसे में सेलिब्रेशन का असली अर्थ गुरुदेव श्री श्रीरविशंकर की नजर से क्या है आइए जानते हैं।

Pongal 2026 से लेकर मकर संक्रांति है नई फसल का जश्न

@aakashavani x चैनल से शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा गया, “पोंगल संक्रांति लोहड़ी का महत्व बिना शेयर किए कोई भी सेलिब्रेशन नहीं हो सकता। जब फसल आती है तो हम अपनी पहली फसल को सबके साथ शेयर करके इसका जश्न मनाते हैं। हर सेलिब्रेशन अपने साथ कुछ सीख लेकर आता ह यहां वीडियो में पोंगल संक्रांति और लोहड़ी के महत्व के बारे में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर बात करते हुए नजर आते हैं।

क्या है पोंगल 2026 का अर्थ और महत्त्व

गुरुदेव कहते हैं यह फसलों का सीजन दुनिया भर में होता है और जब फसल आता हैं। पहला फसल जब आता है तो आप इस सबके साथ शेयर करते हैं और जश्न मनाते हैं। आपको अपने मेहनत का फल मिलता है आपने जितना काम किया है उसका फायदा आपको फसल में देखने को मिलता है। घर में गांव में लोग पहले गन्ना लाते हैं, धान की बोरी लाते हैं इसीलिए वे हर किसी के साथ शेयर करते हैं और सेलिब्रेशन का मतलब बिना शेयर किए नहीं हो सकता।

क्यों मनाया जाता है पोंगल

जहां तक बात करें पोंगल 2026 की तो आखिर इस त्यौहार को क्यों मनाया जाता है। दरअसल यह फसल कटाई का एक प्रतीक है जो सूर्य देव और प्रकृति के लिए आभार व्यक्त करने के लिए सेलिब्रेट किया जाता है। यह नए साल पर फसल और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। किसान अपनी फसल के लिए इंद्र और अपने पशुओं को धन्यवाद देते है। इस दौरान घरों को सजाया जाता है और पवित्र भोजन बनते हैं जिसमें चावल दूध गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है।

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Anjali Wala

अंजलि वाला पिछले कुछ सालों से पत्रकारिता में हैं। साल 2019 में उन्होंने मीडिया जगत में कदम रखा। फिलहाल, अंजलि DNP India वेब साइट में बतौर Sub Editor काम कर रही हैं। उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में मास्टर्स किया है।
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