UGC New Rules: यूजीसी को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है, नए कानून के खिलाफ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे है। मायावती समेत कई राजनेताओं ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इसके अलावा कुमार विश्वास, मनोज मुंतशिर समेत कई नामी लोगों ने भी इस कानून का विरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अधिसूचित यूजीसी के इन नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई थी। आज इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। गौरतलब है कि सवर्ण इन कानून के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे है। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है। सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या यूपी विधानसभा चुनाव में इसका असर पड़ेगा? ऐसा इसलिए क्योंकि यूपी में बड़ी संख्या में सवर्ण समाज रहता है।
UGC New Rules के खिलाफ आज सुप्रीम सुनवाई
बता दें कि यूजीसी के खिलाफ जारी नए कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी। पीटीआई के अनुसार, सुनवाई के दौरान एक वकील ने अदालत के सामने दलील दी कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के लोगों के साथ भेदभाव की आशंका पैदा होती है। वकील ने इस मामले में तात्कालिक हस्तक्षेप की मांग भी की। हालांकि अब देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस कानून पर क्या प्रतिक्रिया देता है। गौरतलब है कि कानून के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है।
दिल्ली से लेकर लखनऊ और यूपी से लेकर बिहार तक, हर जगह इसके खिलाफ सवर्ण समाज विरोध प्रदर्शन कर रहा है। वहीं अब इस कानून को लेकर हो-हल्ला भी शुरू हो गया है। अगर यूजीसी के इस नए नियम की बात कर करें तो इन समितियों में ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और महिला सदस्यों की भागीदारी अनिवार्य होगी।
क्या यूजीसी के नए नियम से यूपी विधानसभा चुनाव में पड़ेगा असर?
बता दें कि उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने है। वहीं अब इस कानून के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है कि क्या इन कानून के बाद क्या यूपी विधानसभा चुनाव में इसका असर पड़ने वाला है? अगर जातीय समीकरण की बात करें तो उत्तर प्रदेश में लगभग 17-19% सवर्ण वोटर रहते हैं जो बीजेपी का कोर वोट बैंक माने जाते हैं, इनमें ब्राह्मण 10%, राजपूत 5%, वैश्य- 2%, भूमिहार 2% और अन्य जातियां शामिल हैं। चूंकि सवर्ण भाजपा का कोर वोट बैंक माना जाता है, तो सीधा सवाल खड़ा हो गया है कि बीजेपी को नुकसान हो सकता है। हालांकि यह तो आने वाले समय ही बताएगा कि सवर्ण समाज अपना वोट किस पार्टी को देता है। वहीं इस मुद्दे पर अखिलेश यादव और मायावती ने भी अपनी प्रतिक्रिया है, हालांकि इसपर दोनों ने ही संतुलन बनाकर रखा।
