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DME Media School ने एचआर कॉन्क्लेव ‘मीडियाकनेक्ट 2.0’ का सफल आयोजन किया

DME Media School : डीएमई मीडिया स्कूल के ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल द्वारा 27 मार्च 2026 को एचआर कॉन्क्लेव ‘मीडियाकनेक्ट 2.0’ का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न मीडिया संगठनों से जुड़े अनुभवी पेशेवरों ने भाग लिया। कॉन्क्लेव का उद्देश्य छात्रों को कॉर्पोरेट और प्रोफेशनल माहौल से परिचित कराना था, ताकि वे भविष्य में कार्यस्थल की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकें। इस वर्ष का विषय था— “कॉन्शियस अनबॉसिंग: जेन ज़ी मिडिल मैनेजमेंट को क्यों नकार रही है?”

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By: ROZY ALI

Published: मार्च 27, 2026 4:56 अपराह्न

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DME Media School : डीएमई मीडिया स्कूल के ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल द्वारा 27 मार्च 2026 को एचआर कॉन्क्लेव ‘मीडियाकनेक्ट 2.0’ का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न मीडिया संगठनों से जुड़े अनुभवी पेशेवरों ने भाग लिया। कॉन्क्लेव का उद्देश्य छात्रों को कॉर्पोरेट और प्रोफेशनल माहौल से परिचित कराना था, ताकि वे भविष्य में कार्यस्थल की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकें। इस वर्ष का विषय था— “कॉन्शियस अनबॉसिंग: जेन ज़ी मिडिल मैनेजमेंट को क्यों नकार रही है?”

मीडिया विभाग की प्रमुख डॉ. पारुल मेहरा ने उद्घाटन संबोधन दिया

कार्यक्रम की शुरुआत फैकल्टी सदस्य सुश्री गरिमा जैन द्वारा स्वागत भाषण और मीडियाकनेक्ट की अवधारणा से परिचय के साथ हुई। इसके बाद मीडिया विभाग की प्रमुख डॉ. पारुल मेहरा ने उद्घाटन संबोधन दिया। उन्होंने विषय की प्रासंगिकता, आज के मीडिया उद्योग में युवा पेशेवरों की भूमिका और बदलते कार्य परिवेश के अनुरूप खुद को ढालने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत डॉ. विशाल सहाय और डॉ. यामिनी खुल्लर के साथ मिलकर अतिथियों का सम्मान किया गया।भारत एक्सप्रेस के एचआर हेड श्री अमिताभ चक्रवर्ती ने अपने संबोधन में पेशेवर जीवन में ज्ञान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आत्म-जागरूकता, अपनी ताकत और कमजोरियों को समझने तथा कार्यस्थल की स्पष्ट समझ को एक सफल मीडिया प्रोफेशनल की पहचान बताया।

जेन ज़ी की सोच पारंपरिक दृष्टिकोण से काफी अलग है

इसके बाद WION की संपादक सुश्री विदेशा केमकर ने छात्रों से संवाद करते हुए सवाल पूछा—“आपके लिए सफलता का क्या मतलब है?” उन्होंने बताया कि सफलता की परिभाषा हर व्यक्ति और हर पीढ़ी के लिए अलग होती है, और जेन ज़ी की सोच पारंपरिक दृष्टिकोण से काफी अलग है।
अमर उजाला की एचआर हेड सुश्री रेनू मट्टू ने जेन ज़ी कर्मचारियों के व्यवहार, अनुशासन और सीखने के तरीकों पर चर्चा की और बताया कि ये बदलाव आज के कार्यस्थल को किस तरह प्रभावित कर रहे हैं।
थीम्स इवेंट मैनेजमेंट के निदेशक एवं सीईओ श्री सिमरजीत सिंह भाटिया ने इवेंट इंडस्ट्री में अपने अनुभव साझा किए और जेन ज़ी के ऊर्जा से भरपूर और लक्ष्य-उन्मुख कार्यशैली पर प्रकाश डाला।
माय एफएम की एचआर हेड सुश्री नेहा वद्रा ने रेडियो इंडस्ट्री को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण साझा करते हुए बताया कि आज भी विश्व की लगभग 47.5% आबादी प्रतिदिन रेडियो सुनती है, जो इस माध्यम की प्रासंगिकता को दर्शाता है।

जेन ज़ी को कम नहीं आंका जाता

कॉन्क्लेव के दौरान छात्रों और वक्ताओं के बीच प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें जेन ज़ी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जेन ज़ी को कम नहीं आंका जाता, बल्कि सही मार्गदर्शन मिलने पर वे उत्कृष्ट परिणाम देने में सक्षम हैं।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. विशाल सहाय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और अपने अनुभवों के आधार पर शोध, समर्पण और मजबूत कार्य नैतिकता के महत्व को रेखांकित किया।
अंततः यह कॉन्क्लेव एक सार्थक पहल साबित हुआ, जिसने छात्रों और उद्योग के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास किया—यह स्पष्ट करते हुए कि शिक्षा में जो सीखा जा रहा है और उद्योग की वास्तविक अपेक्षाओं के बीच का अंतर समझना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

 

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