Deep Vein Thrombosis: पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव के लिए 13 मई 2026 की सुबह जानलेवा साबित हुई अचानक से उनकी तबियत बिगड़ी और जान चल गई। प्रतीक यादव रोज जिम जाते थे और खूब एक्सरसाइज करते थे। पोस्टमार्टम में डॉक्टर्स ने पाया है कि, उनकी मौत ‘मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म’ से हुई है। डीप वेन थ्रोम्बोसिस एक ऐसा बीमारी है जो पैरों में खून का थक्का जमने से शुरु होती है। स्थिति बिगड़ने पर पैरों की गहरी नसों में जमा खून का एक बड़ा थक्का टूटकर फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं तक जाता है। इसके बाद ऑक्सीजन की कमी के कारण पीड़ित की हार्ट अटैक या फिर कार्डिक अरेस्ट से मौत हो जाती है। अगर समय रहते इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए तो मरीज की जान जाने से बच सकती है।
प्रतीक यादव की जान लेने वाली Deep Vein Thrombosis बीमारी को कैसे पहचानें?
डीप वेन थ्रोम्बोसिस से जुड़ी हुई जानाकरी डॉक्टर सुमित कपाड़िया के द्वारा drsumitkapadia नाम के यूट्यब चैनल पर दी जा रही है। वो इस गंभीर बीमारी के कुछ लक्षणों के बारे में बता रहे हैं। जो कि, शुरुआती दौर में मरीज पर दिखते हैं।वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुमित कपाड़िया का कहना है कि, डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी की DVT के लक्षण सबसे पहले पैर में दिखते हैं। इसमें पिंडली में तेज दर्द होने लगता है। इसके बाद सूजन बढ़ने लगता है। मांसपेशियों की ऐंठन मरीज का चलने-फिरने और लेटने-बैठना तक मुश्किल कर देती है।
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इसके साथ ही सूजा हुआ पैर लाल पड़ने लगता है। इसके साथ ही नसों का उभरना भी पैरों में साफ देखा जा सकता है। समय पर इलाज ना मिलने पर अचानक सांस फूलने या सांस लेने में भारीपन मरीज को परेशान कर सकता है। इसके साथ ही छाती में तेज दर्द होना और खांसी के साथ खून आना भी शुरु हो जाता है। सही इलाज ना मिलने पर खून का थक्का टूटकर फेफड़ों और हार्ट की नलियों में फंस जाता है। जिसके कारण मरीज की मौत हो जाती है। उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की मौत भी मैसिव पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण हुई है। शुरुआती दौर में ये लक्षण बेहद सामान्य लग सकते हैं। जिन्हें अकसर लोग इग्नोर कर जाते हैं। जिसके कारण उनकी जान तक चली जाती है। इस बीमारी का वैसे तो खराब लाइफस्टाइल प्रमुख कारण है लेकिन ये डिप्रेशन और हाईपर टेंशन से भी हो सकती है।
डीप वेन थ्रोम्बोसिस का इलाज क्या है?
अगर डीप वेन थ्रोम्बोसिस बीमारी के बारे में मरीज को सही समय पर पता चल जाए को उसकी जान बच सकती है। इस बीमारी में डॉक्टर खून के थक्के पतला करने के लिए पैरों की नसों में हेपरिन या लो-मॉलिक्यूलर-वेट हेपरिन का इजेक्शन दे सकते हैं। कुछ मामलों में हेल्थ एक्सपर्ट वारफेरिन, रिवरोक्सैबन और एपिक्सैबन जैसी दवाई दे सकते हैं। अगर थक्का बहुत बड़ा हो गया है तो डॉक्टर्स क्लॉट बस्टर्स भी कर सकते है। कुछ मामलों में डॉक्टर थेरेपी का सहारा भी लेते हैं। वहीं, कुछ लोग सर्जरी का सहारा भी लेते हैं। लेकिन काफी विशेषज्ञों का मानना है कि, DVT में सर्जरी कराना जानलेवा साबित हो सकता है। इसीलिए सबसे पहले अच्छे डॉक्टर का चयन करें। इसके बाद उसके द्वारा बताया गया ट्रीटमेंट ही कराएं।
Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।






