Health Tips: अगर आपको भी अचानक से चक्कर आना शुरु हो गए तो इसका सही कारण जान लें। दरअसल, हमेशा दिमाग घूमने का कारण सर्वाइकल नहीं होता है। इसकी वजह कान का अंधरुनी हिस्सा भी हो सकता है। एम्स दिल्ली की न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रियंका सहरावत का कहना है कि, कान का दिमाग घूमने से काफी गहरा कनेक्शन होता है। इसीलिए अगर इस तरह की समस्या आ रही है तो सबसे पहले कान के डॉक्टर को दिखाएं इसके बाद न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाएं।
Health Tips: चक्कर आने का कारण कान से कैसे है जुड़ा?
डॉक्टर प्रियंका सहरावत का कहना है कि, हमारे शरीर का बैलेंस बनाने का सिस्टम कान के अंदरूनी हिस्से से जुड़ा होता है। जब इसमें कोई समस्या आती है, तो दिमाग को गलत संकेत मिलते हैं और व्यक्ति को चक्कर या सब कुछ घूमता हुआ दिखने लगता है।
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दिमाग पर दिखने वाला ये असर कान की अंधरुनी परत से जुड़ा होता है। लेकिन, अगर किसी को हाथ-पैरों में कमजोरी, मुंह का टेढ़ा होना , बोलने में परेशानी और स्ट्रोक जैसी समस्याएं पैदा हो हो रही हैं तो इस स्थिति में ही सबसे पहले दिमाग के डॉक्टर यानी की न्यूरो को दिखाना चाहिए।
चक्कर आने पर क्या करें?
डॉक्टर का कहना है कि, कान के अंदर घुमाव दार नलियां होती हैं। इनमें लिक्विड भरा होता है। जब सिर हिलता है तो ये भी हिलान शुरु हो जाती है। कान की नलियों में मौजूद बाल हमारे दिमाग को घूमने का सिग्नल देते हैं। जिसके कारण चक्कर आने की स्थिति पैदा होती है। कान में पानी भरने और ईयरफोन का अधिक सेवन करने से ये समस्याएं पैदा होती हैं। इसीलिए हद से ज्यादा ईयरफोन का यूज करना बंद कर दें। इसके साथ ही पहले कान के डॉक्टर को दिखाएं , फिर उसी के हिसाब से इलाज कराएं। लेकिन हद से ज्यादा अगर चक्कर आ रहे हैं और सिर में दर्द हो रहा है तो न्यूरो डॉक्टर को जल्द से जल्द दिखाएं।
Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।






