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गुरु, देवी-देवता या माता! जगत में प्रथम पूज्यनीय कौन? Premanand Maharaj के एक जवाब ने खोल दी कलई; आप भी सुनें दिव्य विचार

जगत में प्रथम पूज्यनीय के रूप में किसे देखा जाना चाहिए, इसको लेकर गुरु Premanand Maharaj ने बड़ी बात कह दी है। प्रेमानंद महाराज ने मां को जगत में प्रथम पूज्यनीय के रूप में बताया है। गुरु प्रेमानंद ने उन तमाम संतानों को संदेश दिया है जो अपने मां की अवहेलना या निरादर करते हैं।

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By: Gaurav Dixit

Published: मई 16, 2025 5:39 अपराह्न

Premanand Maharaj
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Premanand Maharaj: संपूर्ण जगत में प्रथम पूज्यनीय कौन है इसको लेकर कईयों के मन में अलग-अलग विचार होंगे। कई ऐसे लोग होंगे जो पुख्ता रूप से बगैर किसी लाग लपेट के इस सवाल का जवाब दे सकते हैं। इसी क्रम में प्रेमानंद महाराज ने भी बताया है कि गुरु, देवी-देवता और मां में प्रथम पूज्यनीय कौन है। Premanand Maharaj ने साफ तौर पर कहा है कि मां से बढ़कर इस जगत में कोई नहीं है। ऐसे में आप गुरु को पूजिए, देवी-देवता की भी पूजा कीजिए, लेकिन मां की अवहेलना या निरादर कदाचित ना कीजिए। प्रेमानंद महाराज ने साफ-साफ शब्दों में कहा है कि माता संपूर्ण जगत में प्रथम पूज्यनीय है। गुरु प्रेमानंद ने उन संतानों को खास संदेश दिया है जो रुपए की लालच में अपने मां-बाप को छोड़ दुनिया की चकाचौंध में रम जाते हैं।

Premanand Maharaj के एक जवाब ने खोल दी कलई

भजनमार्ग के एक्स हैंडल से जारी वीडियो में प्रेमानंद महाराज ने साफ तौर पर बिना किसी लाग लपेट के मातृ शक्ति को संपूर्ण जगत में प्रथम पूज्यनीय बताया है। Premanand Maharaj का कहना है कि “जगत में प्रथम पूज्यनीय और सबसे श्रेष्ठ गुरु मां हैं। उन दुराचारियों की क्या बात करें तो मां पर हाथ उठाते हैं और उसे कटुवचन कहते हैं। मां ने ही हमे 9 महीना गर्भ में रखा। आगे कितने वर्षों तक हमारा मल-मूत्र फेंकती रही, दूध पिलाकर हमारा पालन-पोषण किया। और जब उस मां की सेवा का समय आया तो आप कैसे छोड़ सकते हैं।”

गुरु Premanand Maharaj ने आगे कहा कि “मान लीजिए आप लाखों रुपए देकर मां को एक अनाथ आश्रम में रखें। वहां उसे तमाम सुविधाएं मिले, लेकिन प्रेम व्यवहार? वो कहां से लाएगी मां। प्रेम से बढ़कर कोई सुख-सुविधा नहीं होती। सोचो यदि आपको बचपन में अनाथ आश्रम भेजा जाए और पैसा जमा किया जाए, तो क्या हस्र होता। सनद रहे कि सबसे बड़ी मां है। देवी-देवता की पूजा करो, गुरु को पूजो, लेकिन उसके साथ मां को पूजना कभी मत भूलो। इस जगत में यदि प्रथम पूज्यनीय कोई है, तो वो मां है। मां का आशीर्वाद मिल गया, तो आप विश्व ब्रहाम्ड में कभी परास्त नहीं होंगे।”

मां को ही ‘प्रथम गुरु’ क्यों माना गया है?

गुरु प्रेमानंद महाराज ने इसके लिए कई वाजिब तर्क बताए हैं। इससे इतर बात ये है कि जो मातृ शक्ति आपकी उत्पत्ति का आधार है, वो भला प्रथम पूज्यनीय या प्रथम गुरु कैसे नहीं होगी। पुराणों का अध्ययन करने पर भी ज्ञात होगा कि भगवान श्री गणेश जी ने अपने मां-पिता का परिक्रमा किया था और प्रथम पूजनीय बन गए। ऐसे में Premanand Maharaj की बातों के अनुसार भी मां प्रथम गुरु और प्रथम पूज्यनीय है और किसी को भूलकर भी मातृ शक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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