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RSS Centenary Celebrations के अवसर पर संघ का शक्ति प्रदर्शन, पीएम मोदी बोले – ‘आरएसएस के विरुद्ध षड्यंत्र…’ जानें पूरी डिटेल

RSS Centenary Celebrations: 1962 युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ देश के प्रति हमेशा समर्पित रहा है।

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By: Anurag Tripathi

Published: अक्टूबर 1, 2025 1:00 अपराह्न | Updated: अक्टूबर 1, 2025 2:22 अपराह्न

RSS Centenary Celebrations
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RSS Centenary Celebrations: 1962 युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ देश के प्रति हमेशा समर्पित रहा है। बता दें कि 100 साल पूरा होने पर आज आरएसएस सेंटेनरी सेलिब्रेशन में हिस्सा लेने के लिए पीएम मोदी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने डाक टिकट और सिक्का जारी किया, साथ ही यह भी बताया कि कैसे आरएसएस के विरुद्ध षड्यंत्र साजिश रची गई थी। मालूम हो कि चीन युद्ध से लेकर आपातकाल तक आरएसएस ने अहम भूमिका निभाई थी। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी

आरएसएस के विरुद्ध षड्यंत्र रचे गए थे – पीएम मोदी

आरएसएस सेंटेनरी सेलिब्रेशन के दौरान पीएम मोदी ने इशारों-इशारों में विपक्ष पर रोजदार हमला किया। उन्होंने बताया कि कैसे आरएसएस को विरुद्ध षड्यंत्र रखा गया था। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी आरएसएस को कुचलने की साजिश की की गई थी। संघ के विरुद्ध षड्यंत्र रचे गए थे। राष्ट्रीय संव्यसेवक संघ पर तमाम प्रतिबंधों और षड्यंत्रों के बाद भी आरएसएस ने किसी के लिए कटुता के लिए कोई जगह नहीं रखी। क्योंकि संघ जानता है कि वह समाज से अलग नहीं है।

आरएसएस स्वयंसेवकों का देश की संवैधानिक संस्थाओं में अटूट विश्वास है। संघ शाखा का मैदान एक ऐसे प्रेरणाभूमिक है, जहां एक स्वयंसेवक संघ की अहम (में) से वयम (हम) की यात्रा शुरू होती है। यानि यह कहना गलत नहीं होगा कि पीएम मोदी ने इशारों ही इशारों में विपक्ष पर रोजदार निशाना साधा

RSS Centenary Celebrations पर संघ का शक्ति प्रदर्शन

जानकारी के मुताबिक आरएसएस की स्थापना 27 सितंबर 1925 को हुई थी। इसके जनकर केशवराव बलिराम हेडगेवर है। उन्होंने ही संघ की नींव रखी थी। भारत पर आई किसी भी विपत्ति का सामना करने के लिए आरएसएस हमेशा आगे रहा है, चाहे वह 1962 में भारत चीन युद्ध हो, कारगिल युद्ध हो या फिर आपातकाल, हालांकि समय-समय पर आरएसएस के खिलाफ षड्यंत्र रचे गए। वहीं कल यानि 2 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक संघ कई जगहों पर जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। बता दें कि इस दौरान पीएम मोदी ने आरएसएस सेंटेनरी सेलिब्रेशन के अवसर पर राष्ट्र के प्रति आरएसएस के योगदान को उजागर करने वाला विशेष रूप से डिजाइन किया गया स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया।

क्या बीजेपी और आरएसएस में कोई समानताएं हैं?

यह कहना गलत नहीं होगा कि बीजेपी और आरएसएस दोनों एक ही सिक्के के दो पहलु है। आपको बता दें कि बीजेपी के हर चुनाव में आरएसएस एक अहम भूमिका निभाता है। वहीं अगर सामानताएं की बात करें तो दोनों की विचाधारा लगभग-लगभग एक जैसी है, दोनों ही हिदुंत्तव पर मुखर नजर आते है, साथ ही हर चुनाव में आरएसएस बीजेपी की मदद करते हुए नजर आता है।

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Anurag Tripathi

अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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