AI Chatbot: आजकल अधिकतर बच्चों की पहुंच में स्मार्टफोन और स्मार्टटीवी हैं। ऐसे में छोटे बच्चे आसानी से तकनीक का इस्तेमाल तो कर रहे हैं, जिससे वो तकनीक के अनुकूल फिट हो सकते हैं। मगर एआई के बढ़ते इस्तेमाल से छोटे बच्चों के व्यवहार में काफी खतरनाक बदलाव देखने को मिल रहा है। कई हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ऑनलाइन एजुकेशन और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए एआई चैटबॉट बच्चों को खतरनाक बना रहे हैं। ऐसे में बच्चों के अभिभावकों को इस विषय पर खास गौर करने की जरूरत है।
AI Chatbot बच्चों को बना रहे हैं खतरनाक
यह तो आप जानते ही होंगे बच्चे आसानी से चैटजीपीटी एआई टूल समेत कई अन्य टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में अधिकतर समय पर उनके पास माता-पिता नहीं होते हैं, जिस वजह से चैटजीपीटी और गूगल जेमिनी द्वारा प्रदान की गई जानकारी पर छोटे बच्चे आसानी से भरोसा कर लेते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे एआई चैटबॉट की आदत छोटे बच्चों के मानसिक स्तर पर काफी गहरा प्रभाव डालती है। इसके बाद छोटे बच्चों को लगता है यह एआई चैटबॉट जो भी बता रहा है या फिर बोल रहा है, वो सही है। इससे कई बार बच्चों में जिद्दी स्वभाव देखने को मिलता है। ऐसे में बच्चों में स्क्रीन टाइम काफी बढ़ता जाता है, जिससे उनके मानसिक स्तर पर बुरा असर पड़ सकता है।
एआई चैटबॉट से छोटे बच्चों को कैसे दें सुरक्षा, माता-पिता कैसे करें कंट्रोल
अगर आप भी छोटे बच्चों द्वारा एआई चैटबॉट के अधिक इस्तेमाल से परेशान हैं, तो आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है। बच्चों को एआई यानी आर्टिफिशियल के बढ़ते इस्तेमाल के साथ होने वाले खतरों की जानकारी दें। साथ ही बच्चों द्वारा अधिक स्क्रीन करने पर उन्हें गुस्से की बजाय प्यार से समझाएं। बच्चों को बताएं कि एआई एक नॉर्मल टूल है, जिसकी हर बात सही नहीं होती है।
गाजियाबाद में 3 नाबालिग बहनों ने गेमिंग की लत में कर ली आत्महत्या
वहीं, यूपी के गाजियाबाद में हाल ही में 3 नाबालिग बहनों ने कोरियन कल्चर की वजह से 9वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। यूपी पुलिस के मुताबिक, तीनों बहनों कई सालों से स्कूल नहीं जा रही थी। साथ ही लड़कियों के माता-पिता ने उनके ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगा रखा था। इस वजह से तीनों लड़कियां काफी तनाव में थी, ऑनलाइन गेमिंग की आदत इतनी बढ़ गई थी, वो तीनों नाबालिगों के दिमाग पर हावी हो गई और उनकी जान ले ली। ऐसे में माता-पिता को इस मामले से सीख लेकर अपने छोटे बच्चों पर बराबर निगाह रखनी चाहिए। मगर बच्चों को इस तरह से समझाया जाए कि उन्हें किसी तरह का प्रतिबंध नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन लगे।





