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AI in Road Safety: हर साल सैंकड़ों लोग सड़कों पर तोड़ देते हैं दम, एआई रोड एक्सिडेंट रोकने में कैसे कर सकता है मदद; आपको होनी चाहिए ये जानकारी

AI in Road Safety: भारत में हर साल हजारों लोग सड़कों पर अपनी जान गंवा देते हैं। ऐसे में एआई की मदद से सैंकड़ों लोगों की जान को बचाया जा सकता है। इसके लिए कुछ जरूरी उपाय करने होंगे।

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By: Amit Mahajan

Published: फ़रवरी 17, 2026 3:04 अपराह्न

AI in Road Safety
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AI in Road Safety: देश भले ही विकसित होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, मगर अभी भी इंडिया में हर साल सैंकड़ों लोग अपनी अनमोल जिंदगी किसी सड़क पर गंवा देते हैं। सरकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2022 में लगभग 168491 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में चली गई। साल 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 177177 लोगों का हो गया। ऐसे में भारत में रोजाना सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या लगभग 450–500 के आसपास है। यह आंकड़ा वाकई डरावना है। ऐसे में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जब हर सेक्टर में अपनी क्षमता दिखा रहा है, तो सड़क हादसों में कमी लाने में भी अहम योगदान दे सकता है।

AI in Road Safety: अभी कहां हैं चुनौतियां

भारत में सड़क हादसों में मरने वाले लोग अक्सर कुछ समान गलतियां करते हैं। जैसे-गाड़ी को तय सीमा से अधिक रफ्तार पर चलाना। अक्सर रोड पर गलत तरीके से ओवरटेक करना भी एक्सिडेंट की बड़ी वजह बनती है। साथ ही ट्रैफिक सिग्नल और लेन ड्राइविंग का सही से पालन न करना भी लोगों की जान गंवाने का कारण बनता है। इसके अलावा, सड़कों की खराब स्थिति भी लोगों की रोड हादसों में जाने गंवाने की एक प्रमुख वजह है।

सड़क सुरक्षा में एआई कैसे कर सकता है मदद

इंडिया में रोड सेफ्टी के प्रति लोगों को जागरुक करने के साथ ही एआई द्वारा भी सड़क हादसों को रोकने में मदद मिल सकती है।

  • एआई की सहायता से देश में स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट को लागू किया जा सकता है। इस दौरान एआई ट्रैफिक कैमरों और सेंसर से डेटा लेकर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जा सकता है।
  • आजकल कई कारों में एडीएएस यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम की सुविधा मिलती है, जो सामने गाड़ी या पैदल यात्री को देखते ही कार में ब्रेक लगा देते हैं। इसे ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम कहते हैं। यह सिस्टम कार के लेन से बाहर जाते ही वाहन चालक को अलर्ट कर देते हैं। इससे कारों की टक्कर होने की संभावना कम हो जाती है।
  • इसके अलावा, सेल्फ ड्राइविंग तकनीक भी भविष्य की ऑटोमैटिक कारों की टक्कर की संभावना कम हो सकती है। साथ ही गाड़ियों में मिलने वाला 360 डिग्री कैमरा भी अहम योगदान दे सकता है।

ऐसा नहीं है कि एआई या एडवांस तकनीक पर आंख बंदकर करके भरोसा करें, तो सड़कों पर रोड एक्सिडेंट के मामलों में कमी आ जाएगी। मगर हर साल सैंकड़ों लोगों की जान बचाने के लिए जागरुकता के साथ शुरुआती स्तर पर यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना होगा।

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Amit Mahajan

अमित महाजन DNP India Hindi में कंटेंट राइटर की पोस्ट पर काम कर रहे हैं.अमित ने सिंघानिया विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में डिप्लोमा किया है. DNP India Hindi में वह राजनीति, बिजनेस, ऑटो और टेक बीट पर काफी समय से लिख रहे हैं. वह 3 सालों से कंटेंट की फील्ड में काम कर रहे हैं.
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