OnePlus Realme: स्मार्टफोन इंडस्ट्री के दो बड़े नाम वनप्लस और रियलमी अब एक होने जा रहे हैं, मतलब दोनों कंपनियों का मर्जर हो रहा है। ‘9to5google’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों कंपनियों ने चीन में एक नए सब-प्रोडक्ट सेंटर के जरिए अपने मुख्य ऑपरेशन्स को आधिकारिक तौर पर मिला दिया है। ऐसे में दोनों ब्रांड्स की घरेलू (चीनी) और विदेशी (ग्लोबल) प्रोडक्ट डेवलपमेंट टीम्स को एक ही सेटअप के तहत एक साथ लाया गया है।
वनप्लस और रियलमी अपने ऑपरेशन्स को क्यों मिला रहे हैं?
रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ समय पहले ही बताया था कि वनप्लस अप्रैल तक यूरोप में अपना काम-काज बंद कर देगा, और तब से लेकर अब तक, कर्मचारियों की छंटनी और दूसरी बातों से जुड़ी खबरें सामने आई हैं। वनप्लस पिछले कुछ सालों से ओप्पो के एक सब-ब्रांड के तौर पर काम कर रहा है, जबकि रियलमी को इस साल की शुरुआत में ही ओप्पो के साथ मिला दिया गया था।
फोन मार्केट में कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें, मेमोरी की कमी, और शाओमी और सैमसंग से कड़ी टक्कर ने बाजार को और भी मुश्किल बना दिया है। ऐसे में रिसर्च एंड डेवलेप, खरीद, सप्लाई चेन के काम और कुछ मार्केटिंग रिसोर्स को आपस में शेयर करके बीबीके डुप्लीकेट खर्चों में कटौती कर सकता है, तेजी से आगे बढ़ सकता है और दोनों ब्रांड्स की अलग-अलग पहचान बनाए रखते हुए भी उन्हें ग्राहकों के बीच उतार सकता है। वनप्लस अभी भी ज्यादा प्रीमियम परफॉर्मेंस चाहने वाले लोगों पर फोकस करता है, जबकि रियलमी किफायती कीमत पर जोर देता है।
वनप्लस और रियलमी के मर्जर से ग्राहकों पर क्या असर होगा?
स्मार्टफोन मार्केट में वनप्लस और रियलमी के मर्जर से क्या ग्राहकों पर इसका असर पड़ेगा? तो बता दें कि इससे कस्टमर्स को काफी फायदे हो सकते हैं। ग्राहकों को अब सस्ते और बेहतर फोन मिल सकते हैं। साथ ही टेक्नोलॉजी शेयर होने से फोन की लागत कम होगी, तो उससे कम कीमत में ज्यादा फीचर्स मिलने की संभावना है। तीनों कंपनियों के एक होने से लोगों को बेहतर सर्विस इकोसिस्टम मिल सकता है। हालांकि, दोनों कंपनियों के साथ आने से ग्राहकों को एक जैसे ही सॉफ्टवेयर देखने को मिल सकते हैं।






