GDP Growth: भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बार फिर घमासान शुरू हो चुका है। एक तरफ जहां पीएम मोदी ने वीडियो जारी करते हुए पहली तिमाही में डीजीपी ग्रोथ 7.8 बताया था। वहीं अब इस मामले पर विवाद शुरू होता हुआ नजर आ रहा है। दरअसल पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने एक ऐसा बयान दिया, जिसके बाद से ही इस पर सियासत गरमा गई है।
बता दें कि कांग्रेस केंद्र सरकार पर पूरी तरह से हमलावर नजर आ रही है। वहीं अब इसे लेकर सरकार की तरफ से जानकारी साझा की गई है। गौरतलब है कि सुभाष चंद्र गर्ग ने राजनीतिक सरगरमी बढ़ा दी है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
GDP Growth विवाद पर गरमाई सियासत
बता दें कि पूर्व वित्तीय सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने जून तिमाही की ग्रोथ 2.6% बताई, जिसके बाद कांग्रेस ने सरकार पर जीडीपी आंकड़ों में हेरफेर का आरोप लगाया। दरअसल मीडिया से बातचीत में गर्ग ने पुराने और नए आंकड़ों की तुलना करते हुए करीब 2.6 प्रतिशत की वृद्धि का हिसाब सामने रखा है।
उनका तर्क है कि अगर पिछले साल के पुराने नाममात्र जीडीपी आंकड़े और इस साल के मौजूदा आंकड़े को देखा जाए तो 7.8 प्रतिशत की चमकदार वृद्धि की तस्वीर काफी अलग दिखाई देती है। हालांकि अब इस मामले पर खुद केंद्र सरकार की तरफ से जानकारी साझा की गई है।
कैंद्र सरकार ने दी सफाई
पूर्व वित्तीय सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के आरोपो के बाद अब केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा कि “भारत की ग्रोथ की कहानी मज़बूत बनी हुई है। भारत की ग्रोथ रेट 7.8% रही। लेकिन GDP की एक कन्फ्यूज़ करने वाली तुलना चर्चा का विषय बनी हुई है।
India’s Growth Story Stays Strong!
India grew at 7.8%. But a confusing GDP comparison is making headlines.
Here’s what the numbers actually say. Real GDP grew 7.8% YoY in Q1 FY27; nominal GDP grew 10.3%, while the 2.6% figure comes from mixing numbers from two different GDP… pic.twitter.com/nffe4PoTxy
— Arjun Ram Meghwal (@arjunrammeghwal) September 3, 2026
असल में आंकड़े क्या कहते हैं, वह यहाँ बताया गया है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में रियल GDP में साल-दर-साल (YoY) 7.8% की बढ़ोतरी हुई। नॉमिनल GDP 10.3% बढ़ी, जबकि 2.6% का आंकड़ा दो अलग-अलग GDP सीरीज़ के आंकड़ों को मिलाने से आया है। सीधी बात यह है: एक जैसी चीज़ों की ही तुलना करें”। सरकार का कहना है कि आंकड़े अलग-अलग पेश किए गए है। जिसके कारण कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है।
