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जानें क्या है IBM की ये खास योजना, जिसके तहत कर्मचारी को बिना काम किए मिले 8 करोड़ रुपए

किलफोर्ड साल 2008 में सिक लीव पर चला गया। उसने साल 2013 में कंपनी के खिलाफ केस किया जिसमें उसके कहा कि उसे पिछले पांच साल से एक ही वेतन मिल रहा है।

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By: DNP न्यूज़ डेस्क

Published: मई 15, 2023 5:30 अपराह्न

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IBM:प्राइवेट कंपनियों के बारें में बहुत सी बाते जो सुनने को मिलती हैं। उनमें बहुत सी बातें सच हैं और बहुत सी बातें झूंठ है। सच तो ये ही कुछ प्राइवेट कंपनी इंसान को मशीन की तरह इस्तेमाल करती हैं। सुविधा देने जैसे वो जानती ही नहीं है। उन कंपनियों में अक्सर मजबूरी में लोग काम करते हैं। कुछ कंपनी ऐसी होती हैं जिनमें सरकारी नौकरी से भी ज्यादा मिलती है सुविधा। वह कंपनी हर तरह से आपका और आपके परिवार का ख्याल रखती हैं। कंपनी कैसी भी हो छुट्टी को लेकर बहुत ज्यादा असमंजस में रहती हैं। नियम तो कहता है कि अगर कोई अचानक से बिमार हो जाये तो वो सिक लीव पर जा सकता है। कंपनी सिक लीव के दौरान सैलरी भी देती रहती है। उसके बाद बिना सैलरी की छुट्टी पर जाना होता है। इसी तरह की छुट्टी का एक मामला ऐसा है कि जिसे जानकर उड़ जायेंगे आपके होश।

हर साल 55 लाख लेकर भी खुश नहीं

आईबीएम एक आईटी कंपनी है। यह मामला भी इसी कंपनी से जुड़ा है। इस मामले में एक कर्मचारी पिछले 15 सालों से सिक लीव पर था। मजेदार बात है कि उसे कंपनी 15 सालों से सैलरी भी रही थी। सैलरी भी थोड़ी बहुत नहीं बल्कि 54 हजार पौंड सालाना से ज्यादा, जो भारतीय रूपये में एक साल का करीब 55 लाख रूपये हो जाता है। कर्मचारी के हिसाब से बी खुश नहीं था। कर्मचारी ने कंपनी के खिलाफ कोर्ट मे केस कर दिया। उसका आरोप था कि कंपनी उसके साथ भेदबाव कर रही है। वह 15 साल से उसकी सैलरी नही बढ़ा रही है। उसका कहना था कि इस साल 15 साल में मंहगाई बेतहाशा बढ़ी है। उसकी सैलरी लेकिन नहीं बढ़ी है।

पूरा मामला क्या है।

ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ के अनुसार यह केस किया इयान किल्फोर्ड नामक एक कर्मचारी ने अपनी कंपनी पर। उसने 2000 में लोटस डेवलेपमेंट नामक कंपनी में नौकरी शुरू की थी। उसके बाद आईबीएम ने लोटस डेवलपमेंट खरीद लिया। किलफोर्ड साल 2008 में सिक लीव पर चला गया। उसने साल 2013 में कंपनी के खिलाफ केस किया जिसमें उसके कहा कि उसे पिछले पांच साल से एक ही वेतन मिल रहा है। उसके वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
इस पर आईबीएम ने किलपोर्ड को अपनी डिसेबिलिटी योजना का हिस्सा बना दिया। इसके तहत कर्मचारी को 65 साल की उम्र होने तक उसकी सैलरी का 75 फीसदी मिलता रहता है। इस तरह उस हर साल 54, 028 पाउंड यानी करीब 55.34 लाख रुपये मिल रहे थे।

कोर्ट ने क्या कहा

कोर्ट ने किल्फोर्ड की सैलरी बढाने वाली मांग ठुकरा दी है। कोर्ट ने कहा उसे जो रकम मिल रही है तीस साल में मंहगाई के कारम अगर आधी रह जाती है तो भी वो ठीक ठाक रकम है।

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DNP न्यूज़ डेस्क उत्कृष्ट लेखकों एवं संपादकों का एक प्रशिक्षित समूह है. जो पिछले कई वर्षों से भारत और विदेश में होने वाली महत्वपूर्ण खबरों का विवरण और विश्लेषण करता है.उच्च और विश्वसनीय न्यूज नेटवर्क में डीएनपी हिन्दी की गिनती होती है. मीडिया समूह प्रतिदिन 24 घंटे की ताजातरीन खबरों को सत्यता के साथ लिखकर जनता तक पहुंचाने का कार्य निरंतर करता है
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