Jharkhand News: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर झारखंड में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत का भव्य उत्सव शुरू हो गया है। राजधानी रांची में आयोजित झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने राज्यवासियों और आदिवासी समाज को शुभकामनाएं दीं और समृद्ध आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करने का संदेश दिया।
इस साल महोत्सव को खास बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं। राज्य की 33 जनजातियों की अनूठी परंपराओं, कला और जीवन दर्शन को करीब से जानने व अनुभव करने के लिए राज्यवासियों को आमंत्रित किया गया है।
सीएम हेमंत सोरेन ने दो दिवसीय कार्यक्रम का किया शुभारंभ
झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन सरकार ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा कि “आज रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में माननीय राज्यपाल महोदय जी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित ‘झारखण्ड आदिवासी महोत्सव 2026’ के भव्य शुभारंभ कार्यक्रम में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त हुआ। इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई, शुभकामनाएँ एवं जोहार।
झारखंड में हर वर्ष की तरह आज फिर ऐतिहासिक झारखंड आदिवासी महोत्सव मनाया जा रहा है।
विश्व आदिवासी दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित होने वाले इस महाआयोजन के लिए आप सभी का हार्दिक स्वागत, शुभकामनाएं और जोहार।
झारखंड की धरती ने दुनिया को ऐसा जीवन दर्शन दिया है, जहाँ प्रकृति पूजनीय है,… pic.twitter.com/C6qztuswwK
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 9, 2026
झारखंड में हर वर्ष की तरह आज फिर ऐतिहासिक झारखंड आदिवासी महोत्सव मनाया जा रहा है। विश्व आदिवासी दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित होने वाले इस महाआयोजन के लिए आप सभी का हार्दिक स्वागत, शुभकामनाएं और जोहार “।
33 जनजातियों की अनूठी परंपराओं, कला का होगा दर्शन
सीएम हेमंत सोरेन ने लिखा कि “झारखंड की धरती ने दुनिया को ऐसा जीवन दर्शन दिया है, जहाँ प्रकृति पूजनीय है, समुदाय सर्वोपरि है और संस्कृति जीवन का हिस्सा है। यह महोत्सव केवल हमारी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत का उत्सव नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व, अस्मिता और अधिकारों के प्रति हमारे संकल्प का भी उत्सव है।
जल, जंगल, जमीन और अपनी पहचान की रक्षा की लड़ाई हमारी विरासत है, और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखना हमारा संकल्प”। गौरतलब है कि जहां बोलना ही संगीत और चलना है नृत्य। नगाड़ों और मांदर की धुन सिर्फ संगीत का हिस्सा नहीं हैं बल्कि ये झारखंड के धड़कनों में बसती आत्मा की पुकार है। यहां मांदर के हर थाप में बसती है विरासत की गूंज।







