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चुनावी बॉन्ड से लेकर मदरसा शिक्षा अधिनियम तक, साल 2024 में Supreme Court के कुछ अहम फैसले ने खीचा देश का ध्यान; जानें डिटेल

Supreme Court: साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई अहम फैसले सुनाए गए जो कानूनी तौर और देश के नागरिकों के लिए काफी अहम थे।

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By: Anurag Tripathi

Published: दिसम्बर 29, 2024 7:26 अपराह्न

Supreme Court
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Supreme Court: साल 2024 खत्म होने में महज 2 दिन का ही समय बच गया है। लेकिन क्या आपको पता है सुप्रीम कोर्ट के वह फैसले जिसने देश का ध्यान अपने और खीचा है, चलिए आपको बताते है साल 2024 के सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुछ ऐतिहासिक फैसले जिन्होंने चुनाव सुधार, सामाजिक न्याय और कानूनी जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को छुआ। इन फैसलों ने न केवल मौजूदा कानूनों को परिभाषित किया, बल्कि संवैधानिक सवालों का भी समाधान किया।

Supreme Court ने चुनावी बॉन्ड को लेकर सुनाया था फैसला

पारदर्शिता की ओर एक बड़ा कदम फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित चुनावी बॉन्ड योजना को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ (अब सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि मतदाताओं को राजनीतिक फंडिंग के स्रोतों की जानकारी से वंचित करना लोकतांत्रिक नहीं है। कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को तुरंत चुनावी बॉन्ड जारी करना बंद करने का आदेश दिया और चुनाव आयोग को अप्रैल 2019 से राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त योगदान को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश दिया था। जुड़े घोटालों की जांच के लिए SIT जांच की मांग वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसके लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं।

Supreme Court का मदरसा शिक्षा अधिनियम को लेकर अहम फैसला

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा अधिनियम, 2004 को असंवैधानिक घोषित करने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक संस्थानों को प्रबंधित करने के अधिकार को मान्यता दी, लेकिन अधिनियम के कुछ प्रावधानों को यूजीसी अधिनियम से टकराव के कारण अवैध ठहराया।

भर्ती नियमों में पारदर्शिता को लेकर अहम फैसला

Supreme Court ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियमों को तब तक बदला नहीं जा सकता, जब तक कि विज्ञापन में स्पष्ट रूप से इसका उल्लेख न किया गया हो। यह फैसला सरकारी नौकरियों में निष्पक्षता सुनिश्चित करता है।

Supreme Court के अन्य ऐतिहासिक फैसले

नागरिकता अधिनियम और NRC

कोर्ट ने 1955 के नागरिकता अधिनियम की धारा 6A की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, जो असम समझौते को लागू करने के लिए लाई गई थी।

अनुच्छेद 39(b) की व्याख्या

सात-न्यायाधीशों की पीठ ने स्पष्ट किया कि सभी निजी संसाधन “समुदाय के भौतिक संसाधन” नहीं माने जा सकते। यह फैसला व्यक्तिगत संपत्ति अधिकारों और संसाधनों के समान वितरण के बीच संतुलन बनाता है।

अडानी-हिंडनबर्ग विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने अडानी-हिंडनबर्ग विवाद की जांच के लिए SIT गठित करने से इनकार कर दिया और कहा कि SEBI की चल रही जांच पर्याप्त है।

हल्के मोटर वाहन (LMV) लाइसेंस

कोर्ट ने दोहराया कि हल्के मोटर वाहन (LMV) लाइसेंस धारकों को 7,500 किलोग्राम से कम वजन वाले वाहनों को चलाने के लिए अलग से अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है।

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    अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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