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Goiter: क्या गले में लटका जानलेवा घेंघा बिना सर्जरी ठीक हो सकता है? डॉक्टर से जानें

Goiter: क्या गले में लटका बड़ा घेंघा बिना किसी ऑपरेशन के ठीक हो सकता है? जानिए देश के जाने-माने डॉक्टर से वो इसे कम करने का तरीका बता रहे हैं। इसके साथ ही इस दर्दनाक बीमारी से बचने का उपाय भी बता रहे हैं।

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By: ROZY ALI

Published: जून 24, 2026 6:25 अपराह्न

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Goiter: घेंघा गले में लटका एक मांस का गोला होता है। इसका कारण आयोडीन की कमी है। ये तब होता है जब थायरॉइड ग्रंथि का बहुत कम हार्मोन या फिर ज्यादा बनाती है। इस बीमारी में गर्दन फूलने लगती है। इसमें गांठों का गुच्छा बन जाता है। जिसमें तरल पदार्थ भरे होते हैं। अगर लंबे समय तक इसका इलाज ना कराया जाए तो ये सांस की नली को दबाने लगती है। जिसके कारण मरीज की मौत दम घुटने से हो सकती है। ये गांठे कैंसर का रुप भी ले सकती हैं। इसका इलाज दवाई या फिर सर्जरी से होता है। लेकिन काफी लोगो के मन में ये सवाल होता है कि, ये बिना सर्जरी के ठीक हो सकता है। इस सवाल का जवाब डॉक्टर गौरव गंगवानी  के द्वारा दिया जा रहा है।

Goiter को कैसे करें कम?

डॉक्टर गौरव गंगवानी का कहना है कि, सबसे पहले ये पता किया जाता है कि, घेंघा किस कारण हुआ है? उसी के हिसाब से  दवा दी जाती है।अगर आप लिथियम वाली कोई मानसिक बीमारी की दवा ले रहे हैं, या अगर आपके दिल की धड़कन में कोई गड़बड़ी है और आप दिल की धड़कन की गड़बड़ी के लिए दवाएँ ले रहे हैं, जैसे एमियोडेरोन की गोलियाँ,तो इन वजहों से थायरॉइड में सूजन या घेंघा हो सकता है।

देखें वीडियो

इसमें डॉक्टर से सलाह लेकर और दवाएं बदलकर इसे ठीक किया जा सकता है।अगर आपको घेंघा है और साथ ही थायरॉइड का लेवल भी कम है तो डॉक्टर से मिलकर इसे कंट्रोल  करने की दवा लेकर ठीक किया जा सकता है। थायरॉयड में सूजन का एक बहुत आम कारण ऑटोइम्यून फ़िनोमेनन है। ये घेंघा को बढ़ाता है और दर्द की स्थिति को भी पैदा करता है। इसके  इलाज के लिए स्टेरॉयड या इम्यूनोमॉड्यूलेटर का इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही डाइट को कंट्रोल करके भी घेंघा को कुछ हत तक कम किया जा सकता है।  इस बीमारी में गेहूं या ग्लूटेन से जुड़ी हुई चीजें नहीं खाना चाहिए। इस दौरान गोइट्रोजेन्स से भरी हुई चीजें खानी चाहिए। इसमें फूलगोभी और  पत्तागोभी है।

घेंघा की सर्जरी कैसे होती है?

अगर गांठ बहुत बड़ी हो गई हो या कई गांठें बन गई हों, तो इसका इलाज थायरॉइड एम्बोलिज़ेशन से किया जाता है।
एंजियोग्राफी के ज़रिए, हाथ से एक छोटा तार डालकर थायरॉइड की नसों तक पहुंचाया जाता है। हम थायरॉइड की नसों में खून का बहाव रोक देते हैं,जिससे ये गांठें घुल जाती हैं और सिकुड़कर छोटी हो जाती हैं। यह एक बेहतरीन इलाज है। ये एक छोटा सा ऑपरेशन है। जिसके तुरंत बाद मरीज होश में आ जाता है।

 

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