Diabetes: आप अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देकर ब्लड शुगर को कंट्रोल कर सकते हैं क्योंकि आजकल इसका खतरा ना सिर्फ बड़े बुजुर्ग बल्कि बच्चों में देखा जा सकता है। आप अपने बच्चों का खास ख्याल कैसे रख सकते हैं। कैसे डायबिटीज से पहले ही सतर्क हुआ जा सकता है। इस बारे में डॉक्टर ने बात करते हुए पूरी जानकारी लोगों को दी है जो हर पेरेंट्स को जान लेना जरूरी है ताकि आप अपने बच्चों को डायबिटीज से बचा सके। डॉ आलोक चोपड़ा ने एक वीडियो को शेयर करते हुए बताया कि कैसे डायबिटीज की शुरुआत सिर्फ चीनी खाने से नहीं होती है।
कैसे बच्चों का बढ़ सकता है ग्लूकोज
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एक्सपर्ट इस वीडियो में कहते हैं कि टाइप 1 डायबिटीज जन्म से ही बच्चे को हो सकता है लेकिन टाइप 2 डायबिटीज आपकी लाइफ स्टाइल की वजह से होता है। कुछ लोग मानते हैं कि डायबिटीज सिर्फ डायरेक्ट शुगर खाने से आता है। अगर आपका बच्चा पूरे दिन हाई कार्ब, लो फाइबर और लो प्रोटीन का सेवन कर रहा है तो यह उसके शरीर में शुगर बढ़ा रहा है। ब्रेकफास्ट में ब्रेड, आलू पराठा, राइस, चपाती, पैकेट चिप्स स्नैक्स जिसमें काफी कम मात्रा में प्रोटीन होता है और बिल्कुल भी फाइबर नहीं होता यह सब ग्लूकोज बढ़ा सकता है।
सिर्फ चीनी नहीं ये भी है डायबिटीज में रिस्की
अगर आपका बच्चा एक स्लाइस ब्रेड खा रहा है तो वह चार चम्मच चीनी के बराबर है। इसके अलावा पैकेज आइटम, बिस्किट, फ्लेवर्ड योगर्ट के साथ, कैचअप में चीनी की मात्रा काफी ज्यादा होती है। ऐसे में आजकल के बच्चे उनका सेवन काफी ज्यादा कर रहे हैं और उसकी वजह से ग्लूकोज बढ़ता है। न सिर्फ डायबिटीज बल्कि उनका मूड स्विंग, इमोशंस और अटेंशन पर भी असर पड़ता है
किन चीजों से बच्चों में Diabetes को कर सकते हैं कम
भारत में बच्चों में डायबिटीज की समस्या लगातार बढ़ रही है।जैसे जापान सिंगापुर में बच्चों के लिए पोषक तत्व की पहले ही जानकारी दी जाती है और उन्हें जंक फूड से दूर रखा जाता है। ऐसे में पेरेंट्स को बच्चों की डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए जिसमें प्रोटीन के साथ-साथ हेल्दी फैट्स ज्यादा फाइबर की मात्रा हो। बच्चों को साबुत और नेचुरल फूड की आदत डालनी जरूरी होती है।
Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।






