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TV और Smartphone का ज्यादा इस्तेमाल कैसे छोटे बच्चों के लिए है घातक? रिसर्च में हुए खुलासे को पढ़ खुल जाएंगी आंखें

Children Screen Time: एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि छोटे बच्चों (टोडलर्स) के लिए अधिक स्क्रीन टाइम, जैसे कि टीवी और स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल, उनकी भाषा विकास क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

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By: Gaurav Dixit

Published: फ़रवरी 8, 2025 12:58 अपराह्न

Children Screen Time
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Children Screen Time: एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि छोटे बच्चों (टोडलर्स) के लिए अधिक स्क्रीन टाइम, जैसे कि टीवी और स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल, उनकी भाषा विकास क्षमता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, किताबों के संपर्क में आने और वयस्कों के साथ स्क्रीन साझा करने से उनकी भाषा सीखने की क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है।

कैसे किया गया अध्ययन?

इस शोध में 20 लैटिन अमेरिकी देशों के 1878 टोडलर्स (12 से 48 महीने की उम्र के) के डेटा का विश्लेषण किया गया। अगस्त 2021 से मार्च 2023 के बीच हुए इस अध्ययन में स्क्रीन उपयोग, किताबों के संपर्क, और माता-पिता के साथ मीडिया साझा करने के प्रभावों का आकलन किया गया। साथ ही, शोधकर्ताओं ने माता-पिता की शिक्षा, पेशा और आर्थिक स्थिति जैसे कारकों को भी शामिल किया।

Children Screen Time भाषा विकास पर प्रभाव

PLOS ONE जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि टीवी और बैकग्राउंड टीवी का सबसे अधिक उपयोग किया गया, जहां औसतन एक घंटे से अधिक समय तक बच्चे स्क्रीन देखते रहे। ज्यादा स्क्रीन एक्सपोजर का संबंध कमजोर भाषा विकास से देखा गया। इसके अलावा, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में किताबों और शैक्षिक संसाधनों की कमी पाई गई, जिससे बच्चों की भाषा सीखने की क्षमता और अधिक प्रभावित हुई।

किताबों और साझा स्क्रीन टाइम के सकारात्मक प्रभाव: शोध में यह भी सामने आया कि जो बच्चे किताबों के संपर्क में अधिक रहे या जिन्होंने माता-पिता के साथ स्क्रीन कंटेंट देखा, उनकी भाषा क्षमता बेहतर थी। अध्ययन के अनुसार, माता-पिता या अभिभावकों के साथ स्क्रीन साझा करने और शैक्षिक सामग्री को देखने से बच्चों की शब्दावली और संचार कौशल में सुधार हुआ।

मुख्य निष्कर्ष और सुझाव

अध्ययन इस बात की पुष्टि करता है कि अधिक स्क्रीन टाइम छोटे बच्चों की भाषा विकास प्रक्रिया में देरी कर सकता है। हालांकि, यदि स्क्रीन टाइम सीमित रखा जाए और माता-पिता के साथ मिलकर शैक्षिक कंटेंट देखा जाए, तो इसके नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं का सुझाव है कि भविष्य में इस विषय पर और अधिक अध्ययन किए जाने चाहिए, ताकि यह समझा जा सके कि विभिन्न प्रकार के स्क्रीन उपयोग का बच्चों के विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन समय को नियंत्रित करें और उन्हें किताबों से जोड़ें, जिससे उनकी भाषा विकास प्रक्रिया मजबूत हो सके।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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