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भारत के स्पेस प्रोग्राम में मंडराया संकट! 100 वैज्ञानिकों ने छोड़ा ISRO का साथ, वजह कर देगी हैरान, जानें सबकुछ

ISRO: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) का दौर जारी है। जिसने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।

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By: Anurag Tripathi

Published: जुलाई 17, 2026 12:34 अपराह्न

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ISRO: देशभर में एक खबर काफी चर्चाओं में बनी हुई है। बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) का दौर जारी है। जिसने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के मुताबिक गत कुछ महीनों में 100 से अधिक वैज्ञानिकों ने  ISRO का साथ छोड़ दिया है। जिसके बाद कई तरह की चर्चाएं सुरू हो गई है। इसे देखते हुए सरकार भी सख्त मोड़ में आ गई है।

हालांकि संस्था का कहना है कि एजेंसी का कामकाज सामान्य रूप से जारी है और वैज्ञानिकों का आना-जाना किसी भी बड़े संस्थान में सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है। वहीं अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वैज्ञानिकों किस कारण से संस्था को छोड़ रहे है। आईए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।

इन वजह से वैज्ञानिकों ने छोड़ा ISRO का साथ

ISRO के अहम स्पेस मिशन से टैलेंट के बाहर जाने की खबरों पर, स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के पूर्व डायरेक्टर नीलेश एम. देसाई ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि “इस बारे में मैं सबसे पहले यही कहूंगा कि इस खबर की सच्चाई की जांच होनी चाहिए। साथ ही, ISRO जैसे बड़े संगठन में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का आना-जाना एक आम बात है। प्राइवेट सेक्टर में कई मौके बने हैं। खासकर IN-SPACe के बनने और भारत सरकार के स्पेस सेक्टर को खोलने के फैसले के बाद। नतीजतन, कई प्राइवेट कंपनियां और स्टार्टअप इस क्षेत्र में काम करने के लिए उत्सुक हैं, जिससे प्राइवेट सेक्टर में इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की काफी मांग पैदा हो रही है।

इसलिए, मुझे इसमें कोई हैरानी नहीं होती कि यहां के अनुभवी वैज्ञानिक और इंजीनियर प्राइवेट सेक्टर की ओर आकर्षित हो रहे हैं; मैं इसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया मानता हूं। देश के स्पेस सेक्टर के विकास के लिए यह बदलाव ज़रूरी है। जहां ISRO नए, युवा टैलेंट को भर्ती करता रहता है, वहीं अनुभवी प्रोफेशनल्स के लिए, जिन्होंने यहां बहुमूल्य अनुभव हासिल किया है। अपने स्टार्टअप शुरू करना या प्राइवेट सेक्टर में योगदान देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।”

क्या ISRO के मिशनों पर पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवी वैज्ञानिकों के जाने से कुछ परियोजनाओं में तकनीकी अनुभव की कमी महसूस हो सकती है। हालांकि ISRO लगातार नए वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की भर्ती कर रहा है। संगठन का कहना है कि उसके सभी प्रमुख मिशन तय समय के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं। वहीं अगर भारत में आने वाले मिशन की बात करें तो इसमे – गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन, चंद्रयान के भविष्य के मिशन, मंगल मिशन, शुक्र मिशन, नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) समेत कई परियोजनाओं पर फिलहाल काम जारी है।

 

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Anurag Tripathi

अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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