Thalapathy Vijay: दक्षिण भारत की राजनीति में एक ऐसा बड़ा उलटफेर हुआ है जिसने सियासत में दिलचस्पी रखने वालों को चौंकाया है। यहां बात तमिलनाडु में एक्टर विजय की पार्टी को मिली बंपर जीत के संदर्भ में हो रही है। थलपति विजय की तमिलगा वेट्री कड़गम यानी टीवीके ने तमिलनाडु की 234 में से 108 विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की है। टीवीके टीवीके उम्मीदवार वीएस बाबू ने कोलाथुर सीट पर एमके स्टालिन को हरा दिया। तमिलनाडु में महिलाओं के लिए मासिक अनुदान, शिक्षा ऋण समेत कई अहम ऐलान हुए जो थलपति विजय की जीत के अहम सूत्रधार रहे हैं।
तमिलनाडु में Thalapathy Vijay की जीत के प्रमुख सूत्रधार
बीजेपी का अभेद किला कही जाने वाले तमिलनाडु में 108 सीटें जीत कर टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। संभव है कि अन्य कुछ विधानसभा सदस्यों के समर्थन के साथ टीवीके की सरकार बने और थलपति विजय सूबे के नए सीएम। सबसे बड़ा सवाल है कि पहली बार चुनाव लड़ी टीवीके की जीत के सूत्रधार क्या रहे हैं? दावा किया जा रहा है कि थलपति विजय के वादे जनता को खूब पसंद आए हैं। छात्रों के लिए शिक्षा ऋण, महिलाओं को 60 वर्ष की उम्र तक 2500 रुपए का मासिक अनुदान और प्रत्येक परिवार को सालाना 6 मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देना।
ये तमाम ऐसे वादे हैं जिन्होंने तमिलनाडु की जनता को टीवीके की ओर आकर्षित किया है। थलपति विजय ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की दुल्हनों के लिए 8 ग्राम सोना और एक गुणवत्तापूर्ण रेशमी साड़ी देने का वादा भीसभी परिवारों के लिए 25 लाख का स्वास्थ्य बीमा, राशन आपूर्ति की डोरस्टेप डिलीवरी जैसे ऐलान टीवीके की जीत के सूत्रधार बने हैं। थलपति विजय के इन वादों ने तमिलनाडु की जनता को अपनी ओर आकर्षित किया है। इससे बड़े पैमाने पर उन्हें जनसमर्थन मिला है और एक्टर विजय की पार्टी डीएमके को परास्त कर 108 सीट जीतने में कामयाब रही है।
टीवीके की जीत के आगे पस्त हुई डीएमके!
2021 से तमिलनाडु की सत्ता में काबिज सीएम एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके को तमिलनाडु में करारी हार मिली है। 59 सीट जीतकर डीएमके टीवीके के बाद दूसरे नंबर की पार्टी बनी है। थलपति विजय की जीत ने तमिलनाडु की जनता के समक्ष एक विकल्प भी तैयार है। 1967 में कांग्रेस के चुनाव हारने के बाद अन्नादुरई के नेतृत्व में पहली बार डीएमके की सरकार बनी। फिर एम करुणानिधि ने कमान संभाली और सीएम रहे। 1977 में एमजी रामचंद्रन यानी एमजीआर की लहर में एआईएडीएमके सत्ता में आई।
तब से अब तक डीएमके-एआईएडीएमके के इर्द-गिर्द तमिलनाडु की राजनीति घूमती रही है। हालांकि, अब थलपति विजय की जीत ने तमिलनाडु की जनता को एक विकल्प दिया है। अब ये स्पष्ट है कि जनता पारंपरिक वर्चस्व के खिलाफ जनादेश के लिए तैयार है। इसका नमूना तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में दिख गया है। थलपति विजय तीसरी मोर्चा के रूप में आकर सबसे बड़ी पार्टी की रूप में उभरे हैं। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि सूबे में कैसे सरकार बनती है और नई सरकार का नेतृत्व कौन करता है।






