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क्या AI भारत और अमेरिका के चुनावों में कर सकता है खेला? टेक दिग्गजों ने निपटने के लिए किया ये बड़ा काम

AI: दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) यानी एआई (AI) का प्रभाव काफी तेजी से बढ़ा है। ऐसे में एआई का अपना असर चुनावों पर भी डाल सकता है। दुनिया में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एआई का गलत इस्तेमाल हो सकता है। यही वजह है कि विश्व की कई बड़ी कंपनियां एकसाथ आई है। इस संबंध ...

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By: Amit Mahajan

Published: फ़रवरी 18, 2024 6:22 अपराह्न

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AI: दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) यानी एआई (AI) का प्रभाव काफी तेजी से बढ़ा है। ऐसे में एआई का अपना असर चुनावों पर भी डाल सकता है। दुनिया में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एआई का गलत इस्तेमाल हो सकता है।

यही वजह है कि विश्व की कई बड़ी कंपनियां एकसाथ आई है। इस संबंध में दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। साथ ही एआई के गलत उपयोग को रोकने के लिए सभी सावधानियों को अपनाने की बात कही।

AI का गलत उपयोग रोकने के लिए आगे आई ये कंपनियां

खबरों में दावा किया जा रहा है कि टेक कंपनियों ने सम्मेलन के दौरान चुनावों में एआई के जरिए मतदाताओं को गुमराह करने जैसे खतरे पर गहन विचार-विमर्श किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि म्यूनिख में हुए इस समझौते में Adobe, Amezon, Google, IBM, Meta, Microsoft, OpenAI, Tiktok और X समेत 12 कंपनियां शामिल हुई।

क्या है समझौते की जानकारी

इन 12 कंपनियों ने अपने समझौते में कहा है कि वह एक-दूसरे के साथ उन सभी तरीकों को साझा करेगी, जिनसे डीपफेक वायरल होता है। कंपनियों ने कहा कि वह इस दौरान तेज और अहम प्रक्रिया का पालन करेंगी।

  • समझौते के तहत सभी कंपनियां शैक्षिक, वृत्तचित्र, कलात्मक, व्यंग्यात्मक और राजनीतिक अभिव्यक्ति की सुरक्षा पर अधिक जोर देंगी।
  • साथ ही समझौते में ये भी कहा गया है कि ये सभी कंपनियां अपनी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अपनी नीतियों पर ज्यादा जोर देंगी। लोगों को इस संबंध में जागरुक करेंगी, ताकि वह एआई के जाल में फंसने से बच सकें।
  • सम्मेलन में सभी कंपनियों ने डीपफेक फोटो, वीडियो और ऑडियो पर रोक लगाने के लिए गहन नीतियों पर विचार किया गया।
  • चुनाव के दौरान राजनेताओं को खुद ही एआई का गलत इस्तेमाल न करने की जिम्मेदारी लेनी होगी।

AI कंटेंट पर लगाएंगे रोक

एआई का इस्तेमाल करके किसी की भी फर्जी फोटो, वीडियो और ऑडियो बनाई जा सकती है। ऐसे में देखने वाला इसकी पहचान नहीं कर पाएगा कि ये असली है या नकली। ऐसे में प्रमुख हस्तियों और राजनेताओं की पुरानी तस्वीरों और पुरानी आवाज का गलत उपयोग किया जा सकता है। ऐसे में इस पर लगाम लगाने के लिए संयुक्त रूप से सख्त कदम उठाने होंगे।

भारत समेत 50 देशों में होने हैं राष्ट्रीय चुनाव

चुनाव के दौरान मतदाताओं को एआई जेनरेटिड गलत जानकारी दी जा सकती है। साथ ही इस गलत जानकारी को सोशल मीडिया के जरिए प्रसारित किया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका समेत दुनिया के 50 देशों में राष्ट्रीय चुनाव होने वाले हैं। वहीं, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ताइवान और इंडोनेशिया में राष्ट्रीय चुनाव पूर्ण हो चुके हैं।

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Amit Mahajan

अमित महाजन DNP India Hindi में कंटेंट राइटर की पोस्ट पर काम कर रहे हैं.अमित ने सिंघानिया विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में डिप्लोमा किया है. DNP India Hindi में वह राजनीति, बिजनेस, ऑटो और टेक बीट पर काफी समय से लिख रहे हैं. वह 3 सालों से कंटेंट की फील्ड में काम कर रहे हैं.
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