Artificial Intelligence: धीरे-धीरे एआई आम जनजीवन का भी हिस्सा बनता जा रहा है। गौरतलब है कि भारत समेत दुनिया के लगभग सभी बड़े देशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बोलबाला शुरू हो चुका है। छोटी से छोटी जानकारी प्राप्त करने के लिए एआई का इस्तेमाल तेजी से किया जा रहा है।
जिस देखते हुए दुनिया के कई प्रमुख एआई कंपनियां एक ऐसा बदलाव करने जा रही है, जिसने इंजीनियर्स की टेंशन बढ़ा दी है। जानकारी के मुताबिक दुनिया की बड़ी एआई कंपनियां अब आर्ट्स ग्रेजुएट को बड़े पैमाने पर नौकरी पर रख रही हैं। यह बदलाव केवल भर्ती की रणनीति नहीं, बल्कि एआई उद्योग की बदलती जरूरतों का संकेत है।
एआई सेक्टर में क्यों बढ़ी रही है आर्ट्स ग्रेजुएट की मांग
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की कुछ प्रमुख एआई कंपनियां आर्ट्स ग्रेजुएट को नियुक्त कर रही हैं। हाल ही में बैचलर ऑफ फिलॉसफी और पीएचडी होल्डर को अपने यहां फिलॉसफर के रूप में नियुक्त किया है। जिसके बाद सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इंजिनियर्स को छोड़कर कंपनियां इन आर्ट्स ग्रेजुएट को नियुक्त क्यों कर रही है। दरअसल एआई का निर्माण अब केवल इंजीनियरिंग की चुनौती नहीं रह गई है। ये कंपनियां ऐसे लोगों का नेतृत्व कर रही हैं जो भाषा, संस्कृति, नैतिकता और मानवीय व्यवहार को समझते हैं।
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इंजीनियर मॉडल बनाते हैं। लेकिन मानविकी स्नातक तेजी से इस बात को आकार देने में मदद कर रहे हैं कि ये मॉडल मनुष्यों के साथ कैसे बातचीत करते हैं। जैसे-जैसे एआई अधिक स्मार्ट होता जा रहा है, लोगों को समझना तकनीक को समझने जितना ही महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
क्या इंजिनियरों की बढ़ेगी टेंशन – Artificial Intelligence
गौरतलब है कि AI Intelligence में बदलाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इंजिनियरों की टेंशन बढ़ने वाली है। हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि यह स्थिति इंजीनियरों के लिए खतरा नहीं बल्कि प्रतिस्पर्धा का नया दौर है। तकनीकी कौशल आज भी AI उद्योग की रीढ़ हैं, लेकिन अब कंपनियां केवल कोडिंग क्षमता को ही सफलता का पैमाना नहीं मान रहीं। जो इंजीनियर तकनीकी ज्ञान के साथ संचार कौशल, रचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करेंगे, उनकी मांग भविष्य में और बढ़ सकती है।






