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Recession 2024: आर्थिक मंदी की दौर से गुजर रहा है जापान और ब्रिटेन, क्या भारत पर इसका पड़ेगा प्रभाव?

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फाइल फोटो प्रतिकात्मक

Recession 2024: दुनिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं – जापान और यूके हाल ही में आर्थिक मंदी में प्रवेश कर गए है, जो उन वित्तीय संघर्षों को उजागर करती हैं जिनका सामना देश कोविड महामारी के बाद कर रहे हैं। ब्रिटेन ने हाल ही में 2023 की चौथी तिमाही में 0.3 प्रतिशत संकुचन का खुलासा किया और आधिकारिक तौर पर मंदी में प्रवेश कर गया है। आपको बता दें कि यह आर्थिक झटका प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिनकी कंजर्वेटिव पार्टी इस साल के अंत में आम चुनाव की संभावना का सामना कर रही है।

इसके साथ ही, जापान, जो कभी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर था, वह भी देश की वित्तीय व्यवस्था को चरमरा देने वाली कोविड महामारी से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है। जापान अब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की सूची में जर्मनी से नीचे चौथे स्थान पर खिसक गया है।  आज हम इस लेख में बात करेंगे की जापान और यूके में आर्थिक मंदी का कारण क्या है? और क्या भारत पर इसका असर पड़ेगा?

आर्थिक Recession 2024 क्या है?

मंदी को आमतौर पर संकुचन की लगातार दो तिमाहियों की अवधि के रूप में परिभाषित किया जाता है। कुछ महीनों तक आर्थिक मंदी रह सकती है, लेकिन अर्थव्यवस्था वर्षों तक अपने पूर्व शिखर पर नहीं पहुंच पाती है। वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) किसी देश के उत्पादों और सेवाओं के मूल्य का माप है।

आमतौर पर, आर्थिक सुधार के बावजूद बेरोजगारी अक्सर उच्च स्तर पर बनी रहती है, इसलिए सुधार के शुरुआती चरण कई लोगों के लिए निरंतर मंदी की तरह महसूस हो सकती हैं। कमजोर घरेलू मांग, ऊंची मुद्रास्फीति दर, कम औद्योगिक उत्पादन, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, आदि के कारण एक देश की अर्थव्यवस्था मंदी में चली जाती है।

Recession 2024 में जापान की अर्थव्यवस्था की स्थिति क्या है?

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खबरों के मुताबिक पिछली तिमाही में संशोधित 3.3 प्रतिशत की गिरावट के बाद, पिछले साल के अंतिम तीन महीनों में एपीएएन जीडीपी 0.4 प्रतिशत की वार्षिक गति से अनुबंधित हुई। रिपोर्ट से पता चलता है कि परिवारों और व्यवसायों दोनों ने लगातार तीसरी तिमाही में खर्च में कटौती की है, क्योंकि पिछले साल जापान की अर्थव्यवस्था डॉलर के मामले में दुनिया में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर आ गई थी।

Recession 2024 का भारत पर कितना पड़ेगा प्रभाव?

भारत उम्मीद से अधिक विकास दर दर्ज कर रहा है, और दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल करते हुए आगे बढ़ रहा है। वहीं जापान और ब्रिटेन में मंदी का असर भारत में कम होने की संभावना है। गौरतलब है कि आरबीआई बुलेटिन में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2024 की पहली छमाही की गति को बरकरार रखे हुए है।

●हालांकि, भारत दुनिया के बाकी हिस्सों से अछूता नहीं है, और विदेशों में विकास में मंदी व्यापार चैनलों के माध्यम से घरेलू आर्थिक गतिविधि को प्रभावित कर सकती है।

●बता दें कि आईएमएफ के ताजा डेटा के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था 4.112 ट्रिलियन डॉलर के साथ पांचवे पायदान पर है। ऐसे में कई आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जल्द ही जापान को पिछे छोड़ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

मंदी से आम आदमी की  जिंदगी पर कितना पड़ता है असर

गौरतलब है कि आर्थिक मंदी आने के बाद आम जनजीवन पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इससे लोगों के खर्चें बढ़ जाते है और इस दौरान इनकम गिर जाती है, जिससे लोगों को खरीदने की क्षमता कम हो जाती है। आर्थिक मंदी का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ता है, कंपनियां कर्मचारियों को नौकरी से निकाल देते है, जिससे बेरोजगारी बढ़ जाती है। और देश में आर्थिक संकंट जैसे हालात पैदा हो जाते है।

चीन में भी आर्थिक मंदी का संकट?

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन (China Economy) भी तमाम संकटों से जूझ रही है। ब्लूमबर्ग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में आने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (China FDI) का आंकड़ा 30 सालों में सबसे खराब रहा है। बता दें कि चीनी शेयर बाजारों में गिरावट का दौर जारी है।