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EYE CANCER : ये लक्षण बताते हैं आप हो चुके हैं आंखों के कैंसर का शिकार, भूलकर भी न करें अनदेखा

EYE CANCER : रेटिनोब्लास्टोमा के बारे में लोंगो के बीच में जागरूकता फैलाने के लिए 14 मई से 20 मई तक रेटिनोब्लास्टोमा अवेयरनेस वीक मनाया जा रहा है।

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By: DNP न्यूज़ डेस्क

Published: मई 20, 2023 6:30 पूर्वाह्न | Updated: मई 25, 2023 9:57 अपराह्न

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EYE CANCER : वैसे तो हमारे शरीर के सभी अंग हमारे लिए बहुत जरूरी हैं। अगर इसमें से एक भी हिस्सा खराब हुआ , तो हमें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा और जब बात आंखों की आती है, तो हम ज्यादा चौंकन्ने हो जाते है । आजकल आंखों में भी कैंसर का खतरा काफी बढ़ रहा है जिसे मेडिकल भाषा में रेटिनोब्लास्टोमा के नाम से जाना जाता है। इस कैंसर के बारे में लोंगो के बीच में जागरूकता फैलाने के लिए 14 मई से 20 मई तक रेटिनोब्लास्टोमा अवेयरनेस वीक मनाया जा रहा है। इस बीमारी का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।

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क्या है ये रेटिनोब्लास्टोमा

रेटिनोब्लास्टोमा एक तरह का आंखों का  कैंसर है जिसे आमतौर पर छोटे बच्चों के अंदर देखने को मिलता है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में इस बीमारी का खतरा सबसे अधिक देखा गया है। डॉक्टर्स का कहना है कि पेट की पल रहे बच्चों में किसी प्रकार की न्यूट्रियंटस की कमी होने के कारण यह बीमारी बच्चों को हो सकती है इसके अलावा जेनेटिक कारण की वजह से भी बच्चा इस बीमारी का शिकार हो सकता है। हर साल करीब 8000 हजार जन्मे बच्चे में से 5000 हजार बच्चे इस बीमारी का शिकार होते है जिसमें से 1500 से 2000 मामले भारत के है। यह कैंसर आंखों की रेटिना में ही बनता है रेटिना के पीछे एक तंत्रिका टिशू की एक पतली सी परत होती है जिसका असर दोंनो आंखों में भी हो सकता है। यदि समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया तो मरीज को हमेशा के लिए अपनी आंखों की रोशनी गंवानी पड़ सकती है।

क्या है इसके लक्षण

वैसे यह बीमारी आमतौर पर छोटे बच्चों में देखने को मिलती है इसलिए उनमें इनके लक्षण को पहचाना बहुत मुश्किल है फिर भी इसके कुछ लक्षण है  जिसे इस बीमारी को पहचाना जा सकता है

आंखों का सूजना।

आंखों में सफेद चमक।

रोशनी कमजोर होना।

रंगों को सही से नहीं पहचानना आदि।

कैसे होगा इसका इलाज

अगर बच्चों में इस तरह के कोई भी लक्षण पाए जाते है , तो बच्चों को किसी अच्छे डॉक्ट्रर के पास लेकर जाए और समय रहते इसका इलाज कराएं । यदि बच्चों को छोटे प्रकार का ट्यूमर है , तो मामूली से लेजर थर्मोथेरपी से ठीक किया जाता है , वहीं अगर बड़े प्रकार का ट्यूमर है , तो इसके लिए रेडिएशन थेरेपी किया जाता है। इस थेरेपी के अंदर रेडियोएक्टिव किरणों की मदद से ट्यूमर की सिकाई की जाती है और इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों को केवल जानकारी के रूप में लें। DNP News Network/Website/Writer इनकी पुष्टि नहीं करता है। इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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