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Chanakya Niti: ऐसी स्त्री को मर्द तुरंत अपना लेते हैं, क्या आप में हैं ये गुण?

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य बहुत बड़े अर्थशास्त्री, नीतिकार और सलाहकार थे। इनकी नीतियां विश्व प्रसिद्ध है। आचार्य चाणक्य एक बहुत बड़े विद्वान थे। चाणक्य नीति एक ग्रंथ है जिसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। आचार्य ने कई सारी चीजों का उल्लेख किया है। आचार्य चाणक्य ने महिला एवं पुरुष के जीवन पर विस्तार से वर्णन किया ...

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By: Sriya Sri

Published: जनवरी 19, 2023 6:33 अपराह्न

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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य बहुत बड़े अर्थशास्त्री, नीतिकार और सलाहकार थे। इनकी नीतियां विश्व प्रसिद्ध है। आचार्य चाणक्य एक बहुत बड़े विद्वान थे। चाणक्य नीति एक ग्रंथ है जिसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। आचार्य ने कई सारी चीजों का उल्लेख किया है।

आचार्य चाणक्य ने महिला एवं पुरुष के जीवन पर विस्तार से वर्णन किया है। वहीं आचार्य ने पति-पत्नी के रिश्ते को भी विस्तार से बताया है। आचार्य ने इन 4 चीजों के भी विषय में व्याख्या अपनी नीति में किया है जिसको आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे। तो आइए जानते हैं क्या कहना चाहते हैं आचार्य।

इस श्लोक में आचार्य ने किया है व्याख्या

कोकिलानां स्वरो रूपं स्त्रीणां रूपं पतिव्रतम् ।
विद्या रूपं कुरूपाणां क्षमा रूपं तपस्विनाम् ॥

इस श्लोक से क्या निकलता अर्थ

1. स्वर से होती है कोयल की पहचान

आचार्य चाणक्य ने इसमें कई चीजों को विस्तार से बताया है। आचार्य बताते हैं कि कोयल का सौंदर्य उसका स्वर होता है। वो अपने स्वर से ही जानी जाती है। कोयल की मीठी आवाज से ही उसकी पहचान होती है।

2. पवित्रता ही है स्त्री की सुंदरता

वहीं आचार्य ने स्त्री के सौंदर्य के बारे में भी बताया है। आचार्य कहते हैं महिला ही सुंदरता उसका सौंदर्य उनका पवित्रता है। महिला की असली पहचान उसकी पवित्रता से होती है। एक पवित्र महिला की हर जगह पूजा होती है। कहा जाता है स्त्री की सुंदरता उसके प्रतिव्रता और पवित्रता से झलकती है। कहते हैं, ऐसी पत्नी को पाकर पति की किस्मत खुल जाती है।

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3. कुरूप व्यक्ति की होती विद्या से पहचान

आचार्य चाणक्य ने कुरूप लोगों के सौंदर्य के बारे में भी अपनी नीति में विस्तार से बताया है। आचार्य कहते हैं कि कुरूप लोगों की सुंदरता विद्यावान होना है। कुरूप होने के बाद व्यक्ति के पास विद्या होना उसे मान सम्मान का हकदार बनाता है। विद्यावान लोगों की हर जगह पूजा की जाती है।

4. क्षमा करने से बढ़ता साधु का सौंदर्य

इसके बाद इस श्लोक के अंतिम में आचार्य ने बताया है कि एक तपस्वी और साधु का सौंदर्य उनका क्षमा करना है। जो महर्षि किसी भी व्यक्ति को क्षमा कर देते हैं वो सर्वश्रेष्ठ कहलाते हैं।

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Sriya Sri

मेरा नाम श्रीया श्री है। मैं पत्रकारिता अंतिम वर्ष की छात्रा हूं। मुझे लिखना बेहद पसंद है। फिलहाल मैं डीएनपी न्यूज नेटवर्क में कंटेंट राइटर हूं। मुझे स्वास्थ्य से जुड़ी कई चीजों के बारे में पता है और इसलिए मैं हेल्थ पर आर्टिकल्स लिखती हूं। इसके अलावा मैं धर्म, लाइफस्टाइल, एस्ट्रोलॉजी और एजुकेशन के विषय में भी आर्टिकल लिखती हूं।
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