मंगलवार, अप्रैल 16, 2024
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S JaiShankar: एस जयशंकर ने कहा भारत 100 प्रतिशत बनेगा UNSC का स्थायी सदस्य, जानें अभी तक क्यों नही मिली सदस्यता

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S JaiShankar: दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को देखते हुए एक बार फिर यह मांग उठने लगी है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की स्थायी सदस्यता बनाना चाहिए। स्थायी सदस्यता के लिए दुनिया के कई देशों ने इसकी वकालत की है। विदेश मंत्री S JaiShankar ने शनिवार को कहा की उन्हें पूरा विश्वास है कि यूएनएससी की स्थायी सदस्यता मिलेगी, लेकिन यह आसान नही होगा। क्योंकि कई देश हमे रोकना चाहते है। बता दें कि जयशंकर ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में दो दिवसीय हिंद महासागर सम्मेलन में भाग लेते हुए ये बात कही।

S JaiShankar ने कहा 100 फीसदी बनेंगे UNSC का स्थायी सदस्य

विदेश मंत्री ने भारतीय समुदाय के साथ बातचीत के दौरान एक सवाल के उत्तर में कहा कि मुझे 100 फीसदी यकीन है कि हम वहां पहुंचेंगे लेकिन में ईमानदारी से कहूं तो हमे यह आसानी से हासिल नही होगा। क्योंकि दुनिया प्रतिस्पर्धा से भरी है। उन्होंने किसी देश का नाम नही लेते हुए कहा कि कुछ लोग हमे रोकने की कोशिश करेंगे। लेकिन मुझे विश्वाश है कि हम वहां जरूर पहुंचेंगे।

कब हुई थी UNSC की स्थापना?

S jaiShankar
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थापना 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर द्वारा की गई थी। बता दें कि यह संयुक्त राष्ट्रय के 6 प्रमुख अंगों में से एक है संयुक्त राष्ट्र के अन्य 5 अंग हैं – महासभा (UNGA), ट्रस्टीशिप काउंसिल, आर्थिक और सामाजिक परिषद, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय और सचिवालय।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के जनादेश के साथ, वैश्विक बहुपक्षवाद का केंद्र बिंदु है। महासचिव की नियुक्ति सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर महासभा द्वारा की जाती है। UNSC और UNGA संयुक्त रूप से अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीशों का चुनाव करते हैं।

कौन से देश UNSC के स्थायी सदस्य है?

सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन हैं। इन्हीं 5 देशों को वीटो पावर मिला है। जब भी UNSC में कोई फैसला लिया जाता है तो इसके लिए पांचों स्थायी सदस्य की अनुमति अनिवार्य होती है। मान लीजिए कि 5 में से कोई एक देश चार देशों के फैसले के खिलाफ है तो वह वीटो पावर का इस्तेमाल करके उस फैसले को रोक सकता है।

गौरतलब है कि इन स्थायी सदस्य देशों के अलावा 10 अन्य देशों को दो वर्ष की अवधि के लिये अस्थायी सदस्य के रूप में सुरक्षा परिषद में शामिल किया जाता है। पांच सदस्य एशियाई या अफ्रीकी देशों से,दो दक्षिण अमेरिकी देशों से, एक पूर्वी यूरोप से और दो पश्चिमी यूरोप या अन्य।

भारत को UNSC का स्थायी सदस्यता क्यों नही मिली?

चीन नहीं चाहता है कि भारत UNSC के स्थायी सदस्य बने इसलिए वह हमेशा से भारत के UNSC के स्थायी सदस्य बनने का विरोध करते रहा है। आपको बताते चले कि भारत के स्थायी सदस्यता के लिए दुनिया के कई देशों ने इसकी वकालत की है। चीन के पास पांच स्थायी सदस्यों में से एक होने के नाते यूएनएससी में वीटो शक्ति है। उसने अक्सर भारत के स्थायी सदस्य बनने के प्रयासों को रोक दिया है।

कई लोगों का मानना है कि भारत ने अभी भी परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) जैसी संधियों पर हस्ताक्षर नहीं किया है। इसके अलावा भारत UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए G4 के समूह अन्य देशों जापान, ब्राजील और जर्मनी के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है।

क्या भारत बनेगा UNSC का स्थायी सदस्य?

भारत लंबे समय से यूएनएससी के स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर जोर देता रहा है। उसका तर्क है कि ये संख्या इसलिए बढ़नी चाहिए, क्योंकि जब से बना, तब से अब तक कई देश काफी ताकतवर हो चुके हैं। इसके अलावा कई देश भारत का इसपर समर्थन कर चुके है। गौरतलब है कि भारत की उभरती ताकत को अब दुनिया पहचान चुकी है। कोविड-19 महामारी के बाद पूरे विश्व का भरोसा भारत पर अधिक हो गया है।

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