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UTTARAKHAND NEWS : बुजुर्गों की चारधाम यात्रा अब और होगी बेहतर, DHAMI Govt. ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मांगी सलाह

Uttarakhand News: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा करने वाले यात्रियों को अब सरकार के नए नियमों का अनुपालन करना पड़ सकता है। ऐसी राज्य सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से सलाह मांग ली है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आगामी चारधाम यात्रा की तैयारियों के अनुसार अभी से आने वाले तीर्थ यात्रियों हेतु व्यवस्थाओं को चाकचौबंद करना आरंभ कर दिया है। चूंकि विगत वर्ष चारधाम यात्रा के लिए राज्य में रिकॉर्ड तोड़ तीर्थ यात्रियों की संख्या ने दर्शन किए थे। किन्तु इन यात्राओं के मध्य यात्रा मार्ग पर कई यात्रियों की अचानक मृत्यु हो गई थी।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मांगी एडवाइजरी

आपको बता दें उत्तराखंड सरकार विगत वर्ष की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार किसी भी प्रकार का खतरा मोल नहीं लेना चाहती है। गत वर्ष चारधाम यात्रा के मध्य कई श्रद्धालुओं की अचानक यात्रा मार्गों पर ही मृत्यु हो गई थी। तब जांच में पाया गया कि सबसे अधिक श्रद्धालुओं की मृत्यु हृदयाघात होने के कारण हो रही थी। उसमें भी जांच का विश्लेषण करने पर पाया गया कि सबसे अधिक मरने वालों की संख्या में 59 वर्ष या उससे अधिक आयु के श्रद्धालु थे। अतः इन सभी कारणों से सीख लेते हुए राज्य सरकार द्वारा यात्रा उपायों को संबंधित अधिकारियों से मांगा गया। जिसके बारे में विभिन्न अध्ययन रिपोर्टो के आधार पर कुछ सुझाव राज्य सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की संस्तुति के लिए भेजे हैं।

हो सकते हैं यात्रा नियमों में ये परिवर्तन

राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने चारधाम यात्रा के बारे में बताया कि पहले तो राज्य सरकार चारों धामों की धारण क्षमता का मूल्यांकन कर रही है कि कितने श्रद्धालुओं को पहुंचने की व्यवस्था की जाए। इसी के अनुसार यात्रा का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा। चूंकि यात्रा उच्च हिमालयी वातावरण में होती है और गत वर्ष यात्रा मार्ग में मरने वाले श्रद्धालुओं में अधिकांश बुजुर्ग थे। तो ऐसे श्रद्धालुओं को चिन्हित करके उनके लिए विशेष एडवाइजरी जारी करेगी। ऐसे में एक निश्चित आयु के श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को दो चरणों मे सुनिश्चित करने की योजना पर सरकार कार्य कर रही है, क्योंकि सरकार की अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के लद्दाख में बहुत पहले से ऐसी व्यवस्था है।
इसके अनुसार अधिक ऊंचाई वाली यात्रा होने के कारण यात्रा मार्गों पर अनुकूलन शिविर स्थापित किए जाएंगे। जहां एक निश्चित आयु वाले श्रद्धालुओं को एक या दो दिन यात्रा पड़ाव के अनुकूलन शिविर में बिताने पड़ सकते हैं और इस प्रकार यह यात्रा ऐसे श्रद्धालुओं की दो चरणों मे संपन्न हो सकती है।

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